नेपाल बाढ़ का तांडव: 1050 से ज्यादा मौतें, क्या सैटेलाइट अलर्ट बचा सकता था हजारों जिंदगियां?

नेपाल बाढ़ का तांडव: 1050 से ज्यादा मौतें, क्या सैटेलाइट अलर्ट बचा सकता था हजारों जिंदगियां?

नेपाल में 26 अगस्त को कुदरत के बरपे कहर ने भीषण मानवीय त्रासदी का रूप ले लिया है। देश के आठ प्रमुख जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ और मलबे के सैलाब में जान गंवाने वालों का आंकड़ा 1,050 के पार पहुंच चुका है।

राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, करीब 4,000 नागरिक अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत एजेंसियां दिन-रात जुटी हैं। अब तक करीब 12,000 प्रभावितों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया जा चुका है, मगर मलबे के नीचे से लगातार मिल रहे शव स्थिति की भयावहता बयां कर रहे हैं।

सैटेलाइट तस्वीरों में मिले थे खतरे के संकेत

हाल ही में सामने आई हाईरिस्क रिपोर्ट ने इस प्राकृतिक आपदा के तकनीकी पहलुओं पर बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, हिमस्खलन के ढहने से पहले ही उसकी ऊपरी सतह पर एक बड़ी दरार चौड़ी हो रही थी, जिसके स्पष्ट संकेत सैटेलाइट तस्वीरों में दर्ज हो चुके थे। हालांकि, तिब्बत और चीन से सटी कई हिमनदी झीलों पर चेतावनी प्रणालियां (EWS) तो लगाई गई थीं, लेकिन इस खास आपदा स्थल पर कोई सक्रिय ग्लेशियर पूर्व-चेतावनी नेटवर्क मौजूद नहीं था।

10 मिनट की चेतावनी टाल सकती थी महाविनाश

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमस्खलन की रफ्तार इतनी प्रचंड थी कि पारंपरिक इन-चैनल सिस्टम से मिलने वाला अलर्ट रसुवागढ़ी स्थित नेपाल-चीन सीमा चौकी को खाली कराने के लिए नाकाफी साबित होता। इसके बावजूद, यदि निचले इलाकों में महज 10 मिनट या उससे पहले चेतावनी पहुंच जाती, तो एक सुदृढ़ और व्यापक प्रणाली के जरिए सैकड़ों बेकसूर जिंदगियों को समय रहते बचाया जा सकता था। दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि इस विशाल भूस्खलन ने जमीन के भीतर 4 से अधिक तीव्रता का भूकंपीय संकेत पैदा किया, जो यह साबित करता है कि भविष्य में भूकंप-आधारित अर्ली वॉर्निंग नेटवर्क ऐसी आपदाओं को भांपने में मील का पत्थर बन सकते हैं।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वतन वापसी

आपदा के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार सक्रिय है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारतीय दूतावास और नेपाली प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से अब तक 163 भारतीय नागरिकों को आपदाग्रस्त इलाकों से सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिसमें हाल ही में बचाए गए पांच लोग शामिल हैं। इसके अलावा, सीमावर्ती समन्वय के तहत चीन की तरफ से भी 151 भारतीय नागरिक सुरक्षित रवाना किए गए हैं।

चिलिमे की दलदली सुरंगों में भारतीय टीम का जांबाज मिशन

काठमांडू में भारत की 19 सदस्यीय विशेष फोरेंसिक टीम ने जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। वहीं चिलिमे स्थित पनबिजली परियोजना की सुरंगों में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए भारत के विशेष सुरंग बचाव दल (Tunnel Rescue Team) को उतारा गया है। सुरंग के भीतर दलदली तलहटी, भारी कीचड़, संकरे रास्ते और भारी मशीनरी ले जाने की भौगोलिक सीमाओं के बीच यह टीम जान हथेली पर रखकर काम कर रही है। भारतीय जवानों ने देसी फ्लोट्स और अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लेकर सुरंग के सबसे संकरे हिस्सों में प्रवेश किया है ताकि मलबे में दबे आखिरी व्यक्ति तक मदद पहुंचाई जा सके।