'सौतनों की लड़ाई नहीं...' – भारत, चीन और अमेरिका से रिश्तों पर बांग्लादेश का बड़ा बयान, क्या दिल्ली आएंगे पीएम तारिक रहमान?
बांग्लादेश में हुए बड़े सत्ता परिवर्तन के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार की विदेश नीति को लेकर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। भारत, चीन और अमेरिका जैसी वैश्विक महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों के बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक बेहद चौंकाने वाला और बेबाक बयान दिया है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने तीनों देशों के साथ ढाका के त्रिकोणीय कूटनीतिक संबंधों की तुलना अनोखे अंदाज में करते हुए स्थिति साफ की है।
डिप्लोमेसी में 'सौतनों का झगड़ा' नहीं: ढाका का रुख
बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से जब हाल ही में पीएम तारिक रहमान की बीजिंग यात्रा और चीन के साथ बढ़ती नजदीकियों के असर पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्री ने बड़े ही कूटनीतिक और व्यावहारिक अंदाज में कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध कोई 'ज़ीरो-सम गेम' (एक का फायदा, दूसरे का नुकसान) नहीं होते। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि एक देश के साथ हमारे रिश्ते का मतलब यह नहीं है कि हम दूसरे के विरोधी हो गए, यह कोई सौतनों की लड़ाई नहीं है। ढाका किसी भी एक मित्र देश को खुश करने के लिए दूसरे देश के सामरिक या आर्थिक हितों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
क्या नई दिल्ली की यात्रा करेंगे प्रधानमंत्री तारिक रहमान?
भारत और बांग्लादेश के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रहे कूटनीतिक तनाव को कम करने की दिशा में एक बड़ी प्रगति देखने को मिल रही है। भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने का आधिकारिक निमंत्रण भेजा है। बांग्लादेशी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि इस हाई-प्रोफाइल भारतीय आमंत्रण पर वर्तमान में सरकार गंभीरता से समीक्षा कर रही है। हालांकि, पीएम तारिक रहमान को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र में भी शामिल होना है, इसलिए शेड्यूल को देखते हुए भारत यात्रा पर अंतिम मुहर जल्द ही लगाई जाएगी।
भारत-बांग्लादेश रिश्तों में 'इरिटेंट्स' और आपसी मतभेद
ढाका में तैनात भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और बांग्लादेशी विदेश मंत्री के बीच हुई इस उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक में दोनों देशों ने माना कि भविष्य के रिश्तों को संप्रभु समानता और आपसी सम्मान के आधार पर ही आगे बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही बांग्लादेशी विदेश मंत्री ने खुलकर स्वीकार किया कि दोनों पड़ोसियों के संबंधों में कुछ 'इरिटेंट्स' (खटास की वजहें और परेशानियां) मौजूद हैं जिन्हें बातचीत से सुलझाना जरूरी है। कूटनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का प्रत्यर्पण (Extradition), तीस्ता नदी जल बंटवारा और सीमा पर सुरक्षा जैसे पेचीदा मामले इस समय दोनों देशों के बीच मुख्य एजेंडा बने हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय इस यात्रा को लेकर बेहद सकारात्मक है और पीएम तारिक रहमान का दिल्ली दौरा द्विपक्षीय सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है।