परमाणु ताकत पाकिस्तान, ड्रोन मास्टर तुर्किये और पैसों का कुबेर सऊदी अरब; मिलकर बनाया इस्लामिक नाटो

परमाणु ताकत पाकिस्तान, ड्रोन मास्टर तुर्किये और पैसों का कुबेर सऊदी अरब; मिलकर बनाया इस्लामिक नाटो

मीडिल ईस्ट की भू-राजनीति में इन दिनों एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। सुन्नी इस्लामिक दुनिया के तीन प्रमुख देश यानी सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान अब एक बड़े संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। वैश्विक कूटनीतिक हलकों में इस नए त्रिकोणीय गठबंधन को 'इस्लामिक नाटो' (Islamic NATO) का नाम दिया जा रहा है, जिसने दुनिया भर के देशों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

क्या है 'इस्लामिक नाटो' और क्यों बन रहा है ये त्रिकोणीय गठबंधन?

तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS), पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की रियाद में हुई बैठकों के बाद इस बड़े समझौते का खाका तैयार किया गया है। यह नया गठबंधन तीनों देशों की अलग-अलग ताकतों को मिलाकर एक साझा सुरक्षा कवच तैयार करने की रणनीति है। हाल के दिनों में यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने इस प्रक्रिया को और ज्यादा तेज कर दिया है।

इस नए समीकरण में तीनों देशों की भूमिका को कुछ इस तरह बांटा गया है:

  • सऊदी अरब (आर्थिक ताकत): भारी-भरकम वित्तीय पूंजी और क्षेत्रीय आर्थिक प्रभाव।

  • तुर्किये (तकनीकी ताकत): नाटो स्तर की सैन्य क्षमता, एडवांस ड्रोन टेक्नोलॉजी (जैसे बायरकटार) और रक्षा निर्माण।

  • पाकिस्तान (सैन्य ताकत): बड़ी और अनुभवी थल सेना, परमाणु हथियार और युद्ध में परखी हुई ऑपरेशनल क्षमता।

इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशियाई क्षेत्र में सुरक्षा के लिए अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता को कम करना है।

पाकिस्तान की सफाई: 'ये समझौता किसी भी देश के खिलाफ नहीं है'

इस त्रिकोणीय समझौते को लेकर बढ़ रही अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सफाई दी है। उन्होंने इस बात से साफ इनकार किया है कि यह सैन्य ढांचा किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस समझौते का मकसद किसी देश के खिलाफ मोर्चा खोलना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और सुरक्षा मामलों में बाहरी ताकतों पर निर्भरता को घटाना है। इतना ही नहीं, भविष्य में इस ब्लॉक में कतर जैसे अन्य देशों को भी शामिल किए जाने की योजना है। गौरतलब है कि इससे पहले पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब ने 'स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट' पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे अब तुर्किये को जोड़कर एक त्रिपक्षीय (Trilateral) रूप दिया जा रहा है।

Latest Posts