35 रुपये प्रति किलो मिलेगा प्याज, नासिक से दौड़ी 'कांदा एक्सप्रेस'; दिल्ली-चेन्नई समेत इन 5 शहरों को मिलेगा सीधा फायदा
त्योहारी सीजन से ठीक पहले रसोई के बजट पर पड़ रहे दोहरे दबाव के बीच केंद्र सरकार ने आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने का निर्णय लिया है। देश के प्रमुख महानगरों और खुदरा बाजारों में प्याज के दामों में आए तेज उछाल को थामने के लिए उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने नासिक से विशेष मालगाड़ियों—'कांदा एक्सप्रेस' (Kanda Express) का परिचालन शुरू कर दिया है। सरकार अपने रणनीतिक बफर स्टॉक से प्याज की थोक खेप सीधे बड़े खपत केंद्रों तक पहुंचा रही है। इन शहरों में नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) के माध्यम से आम जनता को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज उपलब्ध कराया जाएगा।
किन 5 प्रमुख शहरों में सबसे पहले पहुंचेगी 'कांदा एक्सप्रेस'?
उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के अनुसार, प्याज की यह विशेष खेप महाराष्ट्र के लासलगांव और नासिक के प्रमुख स्टोरेज केंद्रों से लोड होकर रेल मार्गों के जरिए रवाना की गई है। पहले चरण में देश के उन पांच बड़े खपत केंद्रों को लक्षित किया गया है जहां खुदरा कीमतें राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक दर्ज की जा रही हैं:
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (Delhi-NCR): दिल्ली की खुदरा मंडियों में प्याज की कीमत 55 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जहां बुधवार तक प्याज की रैक पहुंचेगी।
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चेन्नई (तमिलनाडु): दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्र चेन्नई में प्याज के भाव 58 से 60 रुपये प्रति किलो के पार चले गए थे।
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मदुरै (तमिलनाडु): तमिलनाडु के दक्षिणी जिलों में आपूर्ति सुदृढ़ करने के लिए मदुरै को प्रमुख वितरण केंद्र बनाया गया है।
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एर्नाकुलम / कोच्चि (केरल): केरल के तटीय और शहरी इलाकों में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एर्नाकुलम में मालगाड़ी अनलोड होगी।
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गुवाहाटी (असम): पूर्वोत्तर राज्यों के प्रवेश द्वार गुवाहाटी के माध्यम से असम और आसपास के पहाड़ी राज्यों में प्याज की सप्लाई नियंत्रित दरों पर सुनिश्चित की जाएगी।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन पांच प्रमुख शहरों में आपूर्ति सामान्य होने के बाद बाजार की मांग और मूल्य स्थिति के आधार पर कोलकाता, लखनऊ, पटना और जयपुर जैसे अन्य शहरों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
35 रुपये किलो कैसे और कहां मिलेगा प्याज?
सरकार द्वारा संचालित बफर स्टॉक की यह खेप मंडियों में पहुंचते ही थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर जारी की जाएगी। आम जनता के लिए रियायती दर पर प्याज खरीदने की त्रिस्तरीय व्यवस्था की गई है:
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NCCF और NAFED के स्थायी बिक्री केंद्र: चिन्हित शहरों में दोनों केंद्रीय एजेंसियों के आधिकारिक बिक्री केंद्रों पर सीधे 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर प्याज की बिक्री होगी।
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मोबाइल वैन और आवासीय सोसायटियों में आपूर्ति: दिल्ली-एनसीआर, चेन्नई और गुवाहाटी की घनी आबादी वाली कॉलोनियों, झुग्गी बस्तियों और प्रमुख चौराहों पर मोबाइल वैन तैनात की जाएंगी ताकि लोगों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
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ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म: केंद्रीय एजेंसियों द्वारा ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) और प्रमुख त्वरित डिलीवरी ऐप्स (Quick Commerce Platforms) के सहयोग से भी रियायती प्याज घर-घर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
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थोक मंडियों में नीलामी: स्थानीय व्यापारियों द्वारा कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों को नाकाम करने के लिए थोक मंडियों में भी नियमित अंतराल पर बफर स्टॉक की नीलामी की जाएगी ताकि खुले बाजार में भी कीमतें नीचे आएं।
अचानक क्यों उछले प्याज के दाम? नासिक की मंडियों में सट्टेबाजी का शक
उपभोक्ता मामले मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 24 अगस्त को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि (27.37 रुपये प्रति किलो) की तुलना में करीब 59 प्रतिशत अधिक है। वहीं थोक कीमतों में भी 68 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 21.23 रुपये से बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलो हो गई है।
मूल्य वृद्धि के कारणों का विश्लेषण करते हुए उपभोक्ता मामलों की सचिव ने एक चौंकाने वाला पहलू उजागर किया। उन्होंने बताया कि उत्पादक क्षेत्र होने के बावजूद नासिक की स्थानीय मंडियों में प्याज के भाव दिल्ली जैसी दूरस्थ खपत मंडियों से अधिक चल रहे हैं। यह स्थिति स्पष्ट रूप से कुछ स्थानीय व्यापारियों और बिचौलियों द्वारा की जा रही गुटबाजी (Cartelisation) और सट्टेबाजी की ओर इशारा करती है। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र के कुछ प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में खरीफ की शुरुआती फसल में 5 से 7 प्रतिशत की हल्की गिरावट की अफवाहों का फायदा उठाकर कृत्रिम रूप से बाजार में तेजी लाने का प्रयास किया गया।
देश में प्याज का कितना है बफर स्टॉक?
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश में प्याज की कोई वास्तविक या संरचनात्मक कमी नहीं है।
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आपातकालीन बफर स्टॉक: केंद्र सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण कोष (Price Stabilisation Fund - PSF) के तहत चालू वित्त वर्ष के लिए NAFED और NCCF के माध्यम से करीब 1.21 लाख टन प्याज का मजबूत बफर स्टॉक तैयार कर रखा है।
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वार्षिक उत्पादन अनुमान: कृषि मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, फसल वर्ष 2025-26 में देश का कुल प्याज उत्पादन लगभग 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के उत्पादन के लगभग बराबर और पूरी तरह संतोषजनक है।
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खरीद मूल्य में संशोधन: किसानों से प्याज की सीधी और त्वरित खरीद सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में खरीद दर को 1,270 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2,645 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया था।
'कांदा एक्सप्रेस' का विस्तार: 14 रैक से बढ़कर 86 रैक तक पहुंचा नेटवर्क
सड़क मार्ग से ट्रकों द्वारा प्याज की ढुलाई में लगने वाले लंबे समय, माल भाड़े के ऊंचे खर्च और रास्ते में खराब होने वाले नुकसान को कम करने के लिए भारतीय रेल के सहयोग से 'कांदा एक्सप्रेस' मॉडल तैयार किया गया है।
वर्ष 2024-25 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई इस पहल के तहत 14 रेल रैक के जरिए 12,000 टन प्याज 5 शहरों में पहुंचाया गया था। इसकी सफलता को देखते हुए वर्ष 2025-26 में इस लॉजिस्टिक नेटवर्क को कई गुना विस्तारित किया गया, जिसके तहत अब तक 86 रैक के जरिए देश के 16 बड़े शहरों में करीब 88,000 टन प्याज की सुरक्षित और त्वरित ढुलाई की जा चुकी है। ट्रेन से थोक आपूर्ति पहुंचने के बाद अगले 48 से 72 घंटों के भीतर खुदरा मंडियों में प्याज की दरों में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक की तेज गिरावट आने की पूरी संभावना है।