PoK पर रिपोर्टिंग से आग बबूला हुआ पाकिस्तान, दुनिया में होती किरकिरी के बीच विदेशी मीडिया पर बैन; पत्रकारों को लेनी होगी NOC
पाकिस्तान की हुकूमत एक बार फिर अपनी पोल खुलने के डर से पूरी तरह बौखला गई है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में मानवाधिकारों के हनन, स्थानीय नागरिकों के विरोध प्रदर्शनों और वहां के हालात पर निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की जमकर किरकिरी हो रही है। दुनिया भर के मीडिया संस्थानों में अपनी नाकामी और बदइंतजामी उजागर होने से घबराई शहबाज शरीफ सरकार ने अब तानाशाही कदम उठाते हुए विदेशी मीडिया की एंट्री और रिपोर्टिंग पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। हालात यह हैं कि अब विदेशी पत्रकारों को PoK में जाकर रिपोर्ट करने से पहले सरकार से आधिकारिक अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी लेनी होगी।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब हो रहा पाकिस्तान का सच
हाल के दिनों में PoK के अंदर महंगाई, बेरोजगारी, बुनियादी सुविधाओं की कमी और मानवाधिकारों के मुद्दों को लेकर जनता सड़कों पर उतर आई थी। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर किए गए दमनकारी अत्याचारों के वीडियो और खबरें जब वैश्विक मीडिया के जरिए दुनिया के सामने आईं, तो पाकिस्तान का असली चेहरा बेनकाब हो गया। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और पश्चिमी देशों के मीडिया संस्थानों ने जब पाकिस्तान की प्रशासनिक विफलता और सेना की दमनात्मक नीतियों को उजागर किया, तो वैश्विक कूटनीति में इस्लामाबाद को भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। अपनी इस अंतरराष्ट्रीय फजीहत को छुपाने के लिए अब मीडिया का गला घोंटने की तैयारी की जा रही है।
पत्रकारों के लिए नई बंदिशें, बिना एनओसी एंट्री पर रोक
पाकिस्तानी प्रशासन और खुफिया एजेंसियों ने अब PoK में विदेशी पत्रकारों के प्रवेश को लेकर बेहद कड़े और मनमाने नियम लागू कर दिए हैं। नए आदेशों के तहत अब किसी भी विदेशी मीडिया हाउस या पत्रकार को वहां की जमीनी हकीकत दिखाने के लिए स्थानीय अधिकारियों से विशेष अनुमति और एनओसी हासिल करनी होगी। जानकारों का मानना है कि यह नियम असल में रिपोर्टिंग करने की अनुमति देना नहीं, बल्कि सच को बाहर आने से रोकने का एक हथकंडा है। सरकार चाहती है कि केवल वही खबरें दुनिया तक पहुंचें जो पाकिस्तानी सेना और सरकार के पक्ष में गढ़ी गई हों, ताकि उनकी दमनकारी नीतियों पर पर्दा डाला जा सके।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंट रहा है इस्लामाबाद
पाकिस्तान हमेशा से ही अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों में प्रेस की स्वतंत्रता का दमन करने के लिए कुख्यात रहा है। स्थानीय पत्रकारों को पहले ही सेना और खुफिया एजेंसियों के दबाव के कारण खुलकर सच लिखने की इजाजत नहीं है, और अब विदेशी मीडिया पर भी नकेल कसकर पाकिस्तान ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी नाकामियों को दुनिया की नजरों से छिपाना चाहता है। विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के प्रतिबंधों से पाकिस्तान की छवि वैश्विक स्तर पर और अधिक धूमिल होगी क्योंकि सेंसरशिप लगाकर सच्चाइयों को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता है।