टोल टैक्स घटाओ वरना तेल रोक देंगे! पाकिस्तान में ड्राइवरों का फूटा गुस्सा, अनिश्चितकालीन चक्का जाम से थमी पहियों की रफ्तार
पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकटों से घिर चुका है, और अब देश की रीढ़ कहे जाने वाले ट्रांसपोर्टर्स और ऑयल टैंकर ड्राइवरों ने भी सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। आसमान छूते टोल टैक्स, भारी-भरकम लेवी और महंगाई की मार से त्रस्त ड्राइवरों ने सरकार को घुटनों पर लाने के लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया है। देश भर में अनिश्चितकालीन 'चक्का जाम' शुरू हो चुका है, जिससे पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई पर सीधा और बड़ा खतरा मंडराने लगा है। ड्राइवरों की दो टूक चेतावनी है कि या तो टोल टैक्स घटाया जाए या फिर देश भर में तेल की सप्लाई पूरी तरह रोक दी जाएगी।
अनिश्चितकालीन चक्का जाम और तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा संकट
पाकिस्तान में ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनों के इस अचानक और कड़े रुख से शहबाज शरीफ सरकार की नींद उड़ गई है। भारी भरकम टोल टैक्स और मनमाने शुल्कों के खिलाफ शुरू हुए इस अनिश्चितकालीन आंदोलन के कारण प्रमुख हाईवे और परिवहन मार्ग पूरी तरह ठप हो गए हैं। ऑयल टैंकर मालिकों और ड्राइवरों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों को मानकर टैक्स में राहत नहीं दी जाती, तब तक पेट्रोल और डीजल की ढुलाई का काम पूरी तरह बंद रहेगा। इस हड़ताल के चलते देश के कई बड़े शहरों में ईंधन की भारी किल्लत और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल सकती हैं।
सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग और ड्राइवरों की प्रमुख मांगें
पाकिस्तानी ड्राइवरों और ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल के दाम और सरकार द्वारा वसूले जा रहे अवैध व अत्यधिक टोल टैक्स ने उनका जीना मुहाल कर दिया है। हालात यह हो गए हैं कि ट्रांसपोर्ट बिजनेस चलाना तो दूर, ड्राइवरों के लिए अपने परिवार का पेट पालना भी मुश्किल हो गया है। सरकार की दमनकारी नीतियों और लगातार थोपे जा रहे करों के खिलाफ देश के कोने-कोने से ड्राइवर सड़कों पर उतर आए हैं। एसोसिएशन के नेताओं का साफ कहना है कि सरकार आम जनता और ट्रांसपोर्टर्स का खून चूसना बंद करे और तुरंत प्रभाव से टोल दरों में भारी कटौती करे।
अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है यह विरोध प्रदर्शन
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान सरकार ने जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह चक्का जाम देश की अर्थव्यवस्था के लिए ताबूत में आखिरी कील साबित हो सकता है। ईंधन की सप्लाई रुकने से न केवल आम जनजीवन अस्त-व्यस्त होगा, बल्कि उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। पहले से ही भुखमरी, महंगाई और कर्ज के जाल में फंसे पाकिस्तान के लिए यह ट्रांसपोर्ट हड़ताल किसी बड़े संकट से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तानी हुक्मरान ड्राइवरों के सामने झुकते हैं या देश को एक और गंभीर आर्थिक व आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ता है।