भारत के साथ रिश्तों पर रूसी राजनयिक ने कही दिल छूने वाली बात, बताया कोई तीसरा देश दखल नहीं दे सकता
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बदलते समीकरणों के बीच भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर से दुनिया भर के लिए चर्चा का केंद्र बन गई है। पश्चिमी देशों के तमाम दबावों और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद दोनों देशों के आपसी रिश्ते समय की हर कसौटी पर खरे उतरे हैं। हाल ही में एक वरिष्ठ रूसी राजनयिक ने भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंधों को लेकर एक ऐसा दिल छूने वाला और स्पष्ट बयान दिया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। रूसी अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि भारत और रूस की अटूट दोस्ती पर किसी भी तीसरे देश या बाहरी ताकत की दखलअंदाजी का कोई असर नहीं पड़ सकता। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कई देश भारत और रूस के बीच बढ़ती नजदीकियों को लेकर अपनी असहजता जाहिर करते रहते हैं, लेकिन रूस के इस स्पष्ट रुख ने यह साबित कर दिया है कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी कितनी मजबूत और भरोसेमंद है।
दशकों पुराना और समय की हर परीक्षा में खरा उतरा रिश्ता
भारत और रूस के बीच मित्रता का यह सफर कोई नया नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें दशकों पुरानी हैं। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज के आधुनिक बहुध्रुवीय विश्व तक, मास्को और नई दिल्ली ने हर परिस्थिति में एक-दूसरे का वफादार साथी बनकर साथ निभाया है। रक्षा सहयोग से लेकर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरिक्ष अनुसंधान से लेकर कूटनीतिक मंचों तक, दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे के हितों का सम्मान किया है। रूसी राजनयिक ने अपने बयान में इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के साथ रूस के संबंध किसी तात्कालिक राजनीतिक फायदे पर आधारित नहीं हैं, बल्कि यह आपसी विश्वास, सम्मान और साझा सांस्कृतिक समझ की मजबूत नींव पर टिके हुए हैं। यही कारण है कि दुनिया में कितनी भी बड़ी आंधी क्यों न आए, भारत-रूस की यह दोस्ती हमेशा चट्टान की तरह अडिग रही है।
'कोई तीसरा देश हमारे आंतरिक और द्विपक्षीय मामलों में नहीं कर सकता दखल'
अपने संबोधन के दौरान रूसी राजनयिक ने पश्चिमी देशों और अन्य बाहरी ताकतों को कड़ा संदेश देते हुए साफ कर दिया कि भारत और रूस के द्विपक्षीय संबंधों में किसी तीसरे देश के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी देश अक्सर यह तय करने की कोशिश करते हैं कि किसे किसके साथ व्यापार करना चाहिए और किसके साथ कूटनीति रखनी चाहिए, लेकिन संप्रभु राष्ट्रों के रूप में भारत और रूस अपने फैसले खुद लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। मास्को का यह बयान इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि रूस भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) का पूरा सम्मान करता है। चाहे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दौर हो या वैश्विक दबाव की राजनीति, भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा है और रूस ने कभी भी इस नीति पर सवाल नहीं उठाया है।
रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के मोर्चे पर लगातार मजबूत होती साझेदारियां
आज के समय में भारत और रूस के रिश्ते केवल कूटनीतिक बयानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह जमीन पर बेहद मजबूत आर्थिक और रक्षा समझौतों के रूप में दिखाई देते हैं। रूस भारत का लंबे समय से सबसे बड़ा रक्षा साझीदार रहा है, जो आधुनिक सैन्य उपकरण, तकनीक और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में लगातार सहयोग कर रहा है। इसके अलावा, वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान भारत को रियायती दरों पर कच्चे तेल की आपूर्ति कर रूस ने यह साबित कर दिया है कि वह भारत की आर्थिक सुरक्षा का एक सच्चा मित्र है। ऊर्जा सुरक्षा, उर्वरक आयात और उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं, जिससे आने वाले समय में आर्थिक मोर्चे पर और अधिक मजबूती मिलने की पूरी उम्मीद है।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में भारत की भूमिका को रूस का समर्थन
रूसी राजनयिक ने वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद और उसकी स्वतंत्र विदेश नीति की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि आज का भारत वैश्विक राजनीति में एक ऐसा महाशक्ति के रूप में उभर रहा है जिसकी आवाज को पूरी दुनिया ध्यान से सुनती है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की बात हो या ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों का विस्तार, रूस ने हमेशा वैश्विक मंचों पर भारत की स्थायी सदस्यता और उसकी प्रमुख भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है। रूस का मानना है कि एक न्यायसंगत और बहुध्रुवीय विश्व का निर्माण भारत की सक्रिय भागीदारी के बिना संभव ही नहीं है, और यही वजह है कि दोनों देश मिलकर वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को बुलंद कर रहे हैं।
दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और जन-से-जन का गहरा जुड़ाव
कूटनीति और राजनीति से परे, भारत और रूस के बीच जन-से-जन का संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी इन रिश्तों की असली ताकत है। रूस के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले भारतीय छात्र हों या भारत में लोकप्रिय रूसी कला, साहित्य और योग, दोनों देशों के नागरिकों के दिलों में एक-दूसरे के लिए विशेष सम्मान और आत्मीयता है। रूसी राजनयिक ने अपने बयान के अंत में इस बात पर जोर दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस विरासत को संभाल कर रखना दोनों देशों की प्राथमिकता है। उनका यह दिल छूने वाला बयान यह संदेश देता है कि चाहे दुनिया के राजनीतिक समीकरण कितनी भी करवट लें, भारत और रूस की यह पारंपरिक मित्रता भविष्य में और अधिक प्रगाढ़ होकर मानवता और शांति की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।