सलमान रुश्दी का हमलावर हादी मतार अब 'आतंकवादी' घोषित, अमेरिकी अदालत का बड़ा फैसला
मशहूर और विवादित लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयार्क में हुए जानलेवा हमले के मामले में अमेरिकी अदालत ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने रुश्दी पर चाकू से ताबड़तोड़ वार करने वाले आरोपी हादी मतार को न सिर्फ हमले का, बल्कि आधिकारिक तौर पर आतंकवाद का दोषी करार दिया है। इस फैसले के बाद से यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन है हादी मतार और उसने इस खौफनाक वारदात को क्यों अंजाम दिया था।
कौन है हादी मतार और क्या है उसकी पृष्ठभूमि?
हादी मतार मूल रूप से लेबनानी मूल का अमेरिकी नागरिक है। वारदात के वक्त उसकी उम्र महज 24 साल थी और वह न्यू जर्सी के फेयरव्यू इलाके में अपनी मां के साथ रहता था। अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक, मतार का जन्म कैलिफोर्निया में हुआ था, लेकिन बाद में उसका परिवार न्यू जर्सी शिफ्ट हो गया था। शुरुआती जांच में सामने आया था कि हादी मतार सोशल मीडिया पर बेहद कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित था और वह ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रति सहानुभूति रखता था।
सलमान रुश्दी पर क्यों किया था जानलेवा हमला?
यह घटना साल 2022 की है, जब न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा संस्थान में एक साहित्यिक कार्यक्रम के दौरान हादी मतार ने मंच पर दौड़कर सलमान रुश्दी पर चाकू से कई वार किए थे। इस हमले में रुश्दी की एक आंख की रोशनी चली गई थी और उनका एक हाथ भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था। असल में, सलमान रुश्दी साल 1988 में आई अपनी किताब 'द सैटेनिक वर्सेज' (The Satanic Verses) को लेकर लंबे समय से कट्टरपंथियों के निशाने पर थे। ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला खमेनेई ने रुश्दी के खिलाफ फतवा जारी किया था। हादी मतार इसी फतवे और कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित था।
अमेरिकी अदालत ने क्यों ठहराया आतंकवाद का दोषी?
इस मामले की लंबी सुनवाई के बाद अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने हादी मतार को केवल एक हमलावर नहीं, बल्कि एक आतंकवादी माना है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मतार का उद्देश्य केवल एक व्यक्ति की जान लेना नहीं था, बल्कि वह एक खास विचारधारा के तहत अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने और बड़े पैमाने पर खौफ पैदा करने की कोशिश कर रहा था। यह हमला अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद की श्रेणी में आता है क्योंकि इसके तार विदेशी कट्टरपंथी संगठनों और विचारों से जुड़े हुए थे। इस फैसले के बाद मतार को उम्रकैद या बेहद सख्त सजा मिलना तय माना जा रहा है।