कुमामोटो में तबाही का मंजर: जापान में 7.1 की तीव्रता से डोली धरती, अब तक 13 की मौत, मलबे से आ रही चीखें!
प्रकृति का गुस्सा कब और किस रूप में सामने आ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। जापान का दक्षिणी हिस्सा, खास तौर पर क्यूशू द्वीप का कुमामोटो प्रांत, इस समय एक भीषण त्रासदी से जूझ रहा है। मंगलवार शाम अचानक आई 7.1 तीव्रता की विनाशकारी कयामत ने हंसते-खेलते शहरों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। धरती इस कदर कांपी कि गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 13 मासूम जिंदगियों के खत्म होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, जबकि 380 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार जिंदगी की जंग लड़ रही हैं।
खौफनाक मंजर: आंखों के सामने जमींदोज हो गईं इमारतें
भूकंप का केंद्र कुमामोटो शहर के दक्षिण में स्थित उकी शहर के पास जमीन से महज 10 किलोमीटर गहराई में था। जैसे ही घड़ी में शाम के 4 बजकर 27 मिनट हुए, पूरी धरती हिंसक रूप से हिलने लगी। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके इतने तेज थे कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। उकी और हिकावा शहरों में जापानी सिस्मिक स्केल पर अधिकतम 'तीव्रता 7' दर्ज की गई, जो सबसे विनाशकारी मानी जाती है। देखते ही देखते सड़कें फट गईं, एक्सप्रेसवे के ओवरपास टूट गए और कई रिहायशी मकान ढह गए।
फैक्ट्रियों में ब्लास्ट और ढहती चिमनियां
यत्सुशिरो शहर में आपदा का सबसे भयानक रूप देखने को मिला। यहाँ स्थित 'निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज' की एक विशालकाय फैक्ट्री की चिमनी ताश के महल की तरह भरभरा कर गिर गई, जिसकी चपेट में आने से दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य मलबे के नीचे फंस गए। इसके अलावा, एक स्थानीय शॉपिंग मॉल के पास स्थित पब में भूकंप के तुरंत बाद भीषण विस्फोट हुआ, जिससे आसमान में धुएं का काला गुबार छा गया। इस अकेले ब्लास्ट में ही 55 से ज्यादा लोग झुलस गए हैं, जिनमें से कुछ की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
सुनामी का अलर्ट और मलबे में जिंदगी की तलाश
भूकंप के तुरंत बाद जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने तटीय इलाकों के लिए 1 मीटर (करीब 3.28 फीट) ऊंची लहरों वाली सुनामी की चेतावनी जारी की, जिससे तटीय इलाकों में भगदड़ मच गई। हालांकि, बाद में स्थिति को देखते हुए अलर्ट वापस ले लिया गया, जिससे एक बड़ा खतरा टल गया। लेकिन असली चुनौती अभी भी मलबे के भीतर है। ढहे हुए मकानों, दफ्तरों और नर्सिंग होम के नीचे दर्जनों लोग दबे हुए हैं, जहां से आ रही चीखें रेस्क्यू वर्कर्स के कलेजे को चीर रही हैं। क्रेन और मलबे हटाने वाली मशीनों के साथ सेना और आपदा प्रबंधन की टीमें रात-दिन एक करके लोगों को बाहर निकालने में जुटी हैं।
ब्लैकआउट और थमी शिंकानसेन की रफ्तार
इस जलजले ने कुमामोटो प्रांत के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। स्थानीय बिजली कंपनी क्यूशू इलेक्ट्रिक के मुताबिक, भूकंप के झटके लगते ही करीब 48,000 से अधिक घरों की बत्ती गुल हो गई और पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रसिद्ध बुलेट ट्रेन 'शिंकानसेन' सहित सभी जेआर क्यूशू रेल सेवाओं को तुरंत रोक दिया गया। यहां तक कि यत्सुशिरो स्टेशन के पास एक मालगाड़ी के पटरी से उतरने की भी खबर है। जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाईची ने हाई-लेवल मीटिंग बुलाकर प्रभावित क्षेत्रों में हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं और लोगों को अगले कुछ दिनों तक आने वाले तेज आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) के प्रति बेहद सतर्क रहने को कहा है।