मोहम्मद मुइज्जू को शहबाज शरीफ ने दी डॉक्टरेट की उपाधि
दक्षिण एशिया की भू-राजनीतिक सियासत में इन दिनों खासी हलचल देखने को मिल रही है, जहाँ मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे हैं। लगभग एक दशक से अधिक समय के बाद मालदीव के किसी राष्ट्रपति का यह पहला उच्चस्तरीय पाकिस्तान दौरा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। इस दौरे के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू का बेहद गर्मजोशी के साथ स्वागत किया और उनके नेतृत्व तथा जनसेवा की सराहना करते हुए उन्हें प्रतिष्ठित डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा। इस राजकीय मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए आयाम पर ले जाने के लिए कई दौर की गुप्त और खुली बैठकें हुईं, जिसके बाद कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर बड़े बदलावों की पटकथा लिखी गई है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात और समझौतों के पीछे के असली कूटनीतिक मायने क्या हैं।
व्यापार, रक्षा और तकनीक समेत दोनों देशों के बीच हुए कुल 20 अहम समझौते
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने कुल 20 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। इन समझौतों का मुख्य दायरा व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कृषि, जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे कई संवेदनशील क्षेत्रों तक फैला हुआ है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि आने वाले दो वर्षों में द्विपक्षीय व्यापारिक आंकड़ों को मौजूदा स्तर से कई गुना बढ़ाकर काफी ऊंचाई पर ले जाया जाएगा। इसके अलावा, रक्षा और मैरीटाइम सिक्योरिटी के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और अधिक मजबूत करने को लेकर भी सहमति बनी है, जो हिंद महासागर क्षेत्र के रणनीतिक संतुलन के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पाकिस्तान की ओर से मालदीव को शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में हरसंभव तकनीकी सहायता देने का भी ऐलान किया गया है।
क्षेत्रीय मंच 'सार्क' (SAARC) के पुनरुद्धार को लेकर उठी आवाज, चर्चाओं का बाजार गर्म
इस पूरी यात्रा के दौरान सबसे बड़ा और चौंकाने वाला कूटनीतिक बिंदु क्षेत्रीय संगठन 'सार्क' (SAARC) को दोबारा सक्रिय करने और जिंदा करने का मुद्दा रहा है। मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन के मंच को फिर से पुनर्जीवित करने पर जोर दिया है। चूंकि पिछले कई वर्षों से भारत और पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों तथा अन्य अंदरूनी असहमतियों के कारण सार्क के शिखर सम्मेलन ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं, ऐसे में मुइज्जू द्वारा इस मंच को दोबारा जीवंत करने की बात उठाया जाना दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया कूटनीतिक दांव माना जा रहा है। कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के प्रस्तावों के जरिए छोटे द्वीपीय देश अपनी भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण से क्यों अहम है यह दौरा
पिछले कुछ समय से मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के राजनीतिक रुख और उनके बयानों को लेकर दक्षिण एशिया में लगातार चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में पाकिस्तान के साथ उनके इस उच्चस्तरीय दौरे और इतने बड़े पैमाने पर हुए समझौतों पर भारत समेत दुनिया के कई प्रमुख देशों की पैनी नजर बनी हुई है। एक तरफ जहां पाकिस्तान अपनी आर्थिक और कूटनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय रिश्तों को नए सिरे से साधने में जुटा है, वहीं मालदीव भी अपने पर्यटन और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए बहुपक्षीय कूटनीति पर जोर दे रहा है। राष्ट्रपति मुइज्जू को मिली डॉक्टरेट की उपाधि और दोनों मुल्कों के बीच हुए इन 20 करारों ने आने वाले दिनों में एशियाई कूटनीति की दिशा और दशा तय करने में एक अहम भूमिका निभाने के संकेत दे दिए हैं।