हाथ में बम लेकर स्कूल पहुंचा छात्र, अचानक फटा; 52 लोग आए चमेट में
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में एक शैक्षणिक संस्थान के करीब हुए भीषण ग्रेनेड विस्फोट से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। पश्चिमी काबुल के घनी आबादी वाले दश्त-ए-बर्ची क्षेत्र में स्थित 'शाम-ए हेदायत' प्राइवेट स्कूल के पास यह दुर्घटना हुई, जिसमें स्कूली बच्चों समेत बयावन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
इस पूरी घटना के बाद सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि आखिर एक खतरनाक हथगोला यानी ग्रेनेड एक छात्र के हाथ तक कैसे पहुंच गया और उसमें अचानक विस्फोट कैसे हो गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तालिबान पुलिस के आधिकारिक प्रवक्ता खालिद जादरान ने इस बात की पुष्टि की है कि यह हमला या हादसा हाथ से फेंके जाने वाले ग्रेनेड की वजह से हुआ था, हालांकि प्रशासन की ओर से इसके स्रोत को लेकर अभी पूरी स्पष्टता नहीं दी गई है।
अचानक फटा बम
प्रत्यक्षदर्शियों ने इस मामले में चौंकाने वाला दावा करते हुए बताया कि वह ग्रेनेड असल में एक छात्र के पास ही मौजूद था और उसी दौरान उसमें अचानक धमाका हो गया। राहत की बात यह रही कि वह छात्र भी इस हादसे में घायल हुआ है, लेकिन अभी तक यह रहस्य बना हुआ है कि आखिर उस नासमझ बच्चे को वह खतरनाक हथियार कहां से मिला और उसने उसे स्कूल परिसर तक क्यों पहुंचाया था। घटना 52 से ज्यादा लोग चपेट में आ चुके हैं।
आपको बता दें कि दश्त-ए-बर्ची एक ऐसा संवेदनशील क्षेत्र है जहां बड़ी संख्या में शिया और हजारा समुदाय के लोग निवास करते हैं। पिछले कुछ सालों में इस इलाके के स्कूलों और शैक्षणिक केंद्रों को कई बार आतंकियों द्वारा निशाना बनाया गया है, जिसके चलते यहाँ के लोगों में हमेशा सुरक्षा का एक बड़ा डर बना रहता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा और जांच की मांग
इस पूरे हृदयविदारक घटनाक्रम के बाद देश-दुनिया के दिग्गजों ने अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। अफगानिस्तान में मानवाधिकारों की स्थिति की निगरानी करने वाले संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने इस भयानक घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने इसे मासूम बच्चों को जानबूझकर नुकसान पहुँचाने वाला एक बेहद घिनौना कृत्य करार दिया है और इस मामले की निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच कराए जाने की पुरजोर मांग उठाई है। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं युद्धग्रस्त अफगानिस्तान के भविष्य और वहां की शांति बहाली की प्रक्रिया के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती पैदा कर रही हैं।