चीन से अफगानिस्तान के लिए रवाना हुई पहली सीधी मालगाड़ी: जानिए क्या है यह नया रेल रूट?
दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक नया और बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है। चीन ने अफगानिस्तान के साथ अपने व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए सीधे मालगाड़ी (Freight Train) सेवा की शुरुआत कर दी है। चीन के पूर्वी प्रांत के एक बड़े औद्योगिक केंद्र से रवाना हुई यह पहली मालगाड़ी सीधे अफगानिस्तान के हयारातन ड्राई पोर्ट (Hairatan Dry Port) तक का सफर तय करेगी। यह ट्रेन मध्य एशियाई देशों के रेलवे नेटवर्क और कैस्पियन सागर के पास से होकर गुजरेगी, जो कि अफगानिस्तान तक सामान पहुंचाने के समय को आधा कर देगा। तालिबान शासन के आने के बाद चीन द्वारा शुरू की गई यह सीधी ट्रेन सेवा क्षेत्रीय कूटनीति में बीजिंग की बढ़ती दबदबा बनाने की कोशिशों को साफ दर्शाती है।
पहली मालगाड़ी में क्या-क्या सामान भेजा गया है? व्यापारिक और आर्थिक असर
चीन से रवाना हुई इस ऐतिहासिक मालगाड़ी में सैकड़ों टन औद्योगिक, निर्माण और दैनिक उपभोग का सामान लोड किया गया है। इसमें भारी मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, टेक्सटाइल, घरेलू सामान और बड़े पैमाने पर निर्माण सामग्री शामिल है। अफगानिस्तान में इस समय बुनियादी ढांचे के पुननिर्माण और सड़कों के निर्माण कार्य में चीनी सामानों की भारी मांग है। इस ट्रेन सेवा के शुरू होने से अफगानिस्तान को समुद्री रास्तों या पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे सामान पहुंचाने की लागत में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही चीन अफगानिस्तान से बहुमूल्य खनिज (Minerals) और ड्राई फ्रूट्स वापस लाने के लिए भी इसी रेलवे नेटवर्क का उपयोग करने की योजना बना रहा है।
अफगानिस्तान में पैर पसारता चीन: बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के विस्तार का मास्टर प्लान
अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद से ही चीन वहां खाली हुई जगह को भरने की पूरी कोशिश कर रहा है। तालिबान सरकार को राजनीतिक और आर्थिक रूप से सहारा देकर चीन अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) को अफगानिस्तान तक विस्तार देना चाहता है। अफगानिस्तान दुनिया के सबसे अमीर अनछुए खनिज भंडारों में से एक है, जहां लिथियम, तांबा (Copper), और रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) का विशाल खजाना मौजूद है। चीन की इस सीधी मालगाड़ी सेवा को केवल एक व्यापारिक शुरुआत नहीं, बल्कि अफगानिस्तान के खरबों डॉलर के खनिज संसाधनों पर कब्जा जमाने और मध्य एशिया से दक्षिण पूर्व एशिया को सीधे जोड़ने के मास्टर प्लान के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंताएं? सुरक्षा और चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर असर
चीन और अफगानिस्तान के बीच मजबूत होते इस रेल कॉरिडोर पर भारत को बहुत बारीक और पैनी नजर रखनी होगी। भारत ने अफगानिस्तान में कनेक्टिविटी और व्यापार बढ़ाने के लिए ईरान के चाबहार पोर्ट (Chabahar Port) और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) पर काफी निवेश किया है। लेकिन चीन की यह सीधी मालगाड़ी चाबहार पोर्ट के जरिए होने वाले भारतीय व्यापार को सीधी चुनौती दे सकती है। इसके अलावा, भारत के सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान, चीन और तालिबान का यह नया आर्थिक और रणनीतिक गठजोड़ भारत को उत्तरी सीमा और मध्य एशिया में अलग-थलग करने की कोशिश हो सकता है। चीन का अफगानिस्तान में मजबूत होना भारत के सीमावर्ती सुरक्षा समीकरणों के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो सकता है।