वह राज्य जहां इंसानों और जंगली सूअरों में छिड़ी 'आर-पार की जंग', 4 साल में कर दी आधी आबादी साफ

वह राज्य जहां इंसानों और जंगली सूअरों में छिड़ी 'आर-पार की जंग', 4 साल में कर दी आधी आबादी साफ

भारत के एक प्रमुख राज्य में इंसानों और जंगली जानवरों के बीच का संघर्ष अब एक खूनी मोड़ ले चुका है। यहां खेतों को तबाह करने वाले और इंसानों पर हमला करने वाले जंगली सूअरों के खिलाफ एक बड़ा अभियान चल रहा है। हालात यह हैं कि पिछले चार सालों के भीतर ही इस राज्य में जंगली सूअरों की आबादी में करीब 50 फीसदी तक की भारी गिरावट आ चुकी है। प्रशासन और स्थानीय लोगों द्वारा फसलों को बचाने के लिए ढूंढ-ढूंढकर इन्हें निशाना बनाया जा रहा है, जिसने पर्यावरणविदों और आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

आखिर क्यों इंसानों के जानी दुश्मन बन गए जंगली सूअर?

इस अभूतपूर्व जंग की सबसे बड़ी वजह फसलों का बड़े पैमाने पर होने वाला नुकसान है। पहाड़ी और जंगलों से सटे मैदानी इलाकों में जंगली सूअर झुंड के झुंड आकर रातों-रात किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं। सिर्फ फसल बर्बादी ही नहीं, बल्कि रिहायशी इलाकों में घुसकर इनके द्वारा किए जाने वाले हमलों में कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं तो सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय स्तर पर आर्थिक नुकसान और जान-माल के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं, जिसके तहत इन्हें मारने की अनुमति या विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

4 साल में 50% का सफाया और पारिस्थितिकी तंत्र पर मंडराता खतरा

सरकारी आंकड़ों और स्थानीय रिपोर्टों की मानें तो बीते 4 वर्षों में इस आक्रामक रणनीति की वजह से जंगली सूअरों की संख्या आधी रह गई है। जहां एक तरफ किसान इस कार्रवाई से राहत की सांस ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जाहिर की है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक प्रजाति को इस तरह तेजी से खत्म करने से स्थानीय खाद्य श्रृंखला (Food Chain) और जंगलों के इकोसिस्टम पर इसका बेहद बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल, इंसान और वन्यजीवों का यह टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है और दोनों ओर से वजूद की लड़ाई जारी है।

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