वक्त का पहिया घूमा: जिस भारत को रिकॉर्ड कच्चा तेल बेचता था रूस, अब खुद ईंधन के लिए क्यों फैला रहा उसी 'दोस्त' के आगे हाथ?

वक्त का पहिया घूमा: जिस भारत को रिकॉर्ड कच्चा तेल बेचता था रूस, अब खुद ईंधन के लिए क्यों फैला रहा उसी 'दोस्त' के आगे हाथ?

वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार से एक ऐसी हैरान करने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया है। इसे वक्त का बदला हुआ पहिया ही कहेंगे कि जो रूस अब तक भारत को सबसे ज्यादा कच्चा तेल (Crude Oil) बेचकर उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा था, आज वही रूस अपनी घरेलू ईंधन की किल्लत को दूर करने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त यानी भारत के आगे हाथ फैलाने को मजबूर हो गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने भारत से बड़े पैमाने पर रिफाइंड पेट्रोल (गैसोलीन) का आयात करना शुरू कर दिया है।

यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने बिगाड़ा रूस का खेल, रिफाइनरियां हुईं ठप

इस अप्रत्याशित संकट के पीछे की मुख्य वजह यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा भीषण तनाव है। यूक्रेन ने अपनी युद्ध रणनीति बदलते हुए रूस के भीतर स्थित उसकी तेल रिफाइनरियों, डिपो और ऊर्जा बुनियादी ढांचों पर 50 से अधिक आत्मघाती ड्रोन हमले किए हैं। इन ताबड़तोड़ हमलों की वजह से रूस की तेल शोधन क्षमता (Refining Capacity) को भारी नुकसान पहुंचा है। रूस का पेट्रोल उत्पादन करीब 17 से 25 प्रतिशत तक गिर गया है, जिससे रूस के 11 टाइम जोन वाले विशाल घरेलू बाजार में ईंधन की भारी किल्लत हो गई है और पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

गर्मियों में बढ़ती डिमांड और रूस का 'मास्टर प्लान'

रूस में गर्मियों के इस मौसम में पेट्रोल की घरेलू खपत बढ़कर लगभग 1.10 लाख टन प्रतिदिन तक पहुंच जाती है, जबकि उसकी चालू रिफाइनरियां मांग के मुकाबले काफी कम उत्पादन कर पा रही हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए क्रेमलिन ने भारत सहित अन्य मित्र देशों से हर महीने करीब 4 लाख टन पेट्रोल आयात करने की योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक, भारत से करीब 60,000 मीट्रिक टन पेट्रोल की पहली बड़ी खेप पहले ही समुद्री जहाजों के जरिए रूस के लिए रवाना हो चुकी है। रूस की संसद (स्टेट ड्यूमा) ने टैक्स कानूनों में संशोधन कर भारत से आने वाले इस ईंधन पर तेल कंपनियों को सब्सिडी देने की व्यवस्था भी मंजूर कर ली है।

भारत बना रूस की 'लाइफलाइन', रिफाइंड ऑयल का बढ़ा दबदबा

यह पूरा घटनाक्रम वैश्विक बाजार में भारत के बढ़ते रुतबे को दर्शाता है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के साथ-साथ चौथा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल रिफाइनर (कच्चे तेल को साफ करने वाला देश) भी है। भारत रूस से ही भारी मात्रा में डिस्काउंटेड (सस्ता) कच्चा तेल खरीदता है, उसे अपनी आधुनिक रिफाइनरियों में साफ करके पेट्रोल-डीजल बनाता है और अब वही रिफाइंड पेट्रोल वापस रूस को निर्यात किया जा रहा है। इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक दुर्लभ और ऐतिहासिक 'रिवर्सल' (उलटफेर) के रूप में देखा जा रहा है, जिसने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को एक नया आयाम दे दिया है।

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