पाकिस्तान के अस्पतालों में वेंटिलेटर की भारी किल्लत, इलाज के नाम पर बंट रही मौतें!

पाकिस्तान के अस्पतालों में वेंटिलेटर की भारी किल्लत, इलाज के नाम पर बंट रही मौतें!

पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। कंगाली के इस दलदल का सबसे खौफनाक असर अब वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था पर देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान के सरकारी और निजी अस्पतालों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अकाल पड़ चुका है। जीवन रक्षक उपकरण जैसे वेंटिलेटर की भारी किल्लत के चलते अस्पतालों में पहुंचने वाले गंभीर मरीज इलाज के अभाव में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अस्पतालों को अब 'मौत का घर' कहा जाने लगा है।

वेंटिलेटर के लिए मची है हाहाकार, कतार में सांसें

अस्पतालों में आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता न के बराबर रह गई है। एक वेंटिलेटर खाली होने के इंतजार में दर्जनों मरीजों की सांसें अटकी रहती हैं। डॉक्टरों के पास यह चुनने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है कि किसे बचाया जाए और किसे मरने के लिए छोड़ दिया जाए। चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव के लिए फंड न होने के कारण आधे से ज्यादा मशीनें कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। विदेशी मुद्रा भंडार खाली होने से नए उपकरण या उनके स्पेयर पार्ट्स का आयात पूरी तरह ठप पड़ा है।

दवाओं का अकाल और नकली दवाओं का जाल

आर्थिक तंगी की वजह से केवल वेंटिलेटर ही नहीं, बल्कि जीवन रक्षक दवाओं की भी भारी शॉर्टेज हो गई है। कैंसर, दिल की बीमारी और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं बाजार से गायब हैं। इस मजबूरी का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं, जिससे अस्पतालों में इलाज के नाम पर घटिया और नकली दवाएं पहुंच रही हैं। डब्लूएचओ (WHO) के मानकों को ताक पर रखकर बिना जांच के ही मरीजों को दवाएं दी जा रही हैं, जो सीधे तौर पर उनकी मौत का कारण बन रही हैं।

दम तोड़ती स्वास्थ्य प्रणाली से भड़का जनता का गुस्सा

इस बदहाली ने पाकिस्तान के आम नागरिकों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। इस्लामाबाद, कराची और लाहौर जैसे बड़े शहरों के मुख्य अस्पतालों के बाहर मरीजों के परिजनों का गुस्सा फूट रहा है। लोगों का कहना है कि सरकार डिफ़ॉल्ट से बचने के दावों में व्यस्त है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बुनियादी स्वास्थ्य बजट में भारी कटौती कर दी गई है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय मदद तुरंत नहीं मिली, तो पाकिस्तान की पूरी स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह क्रैश हो जाएगी।

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