PAK से ही संघर्ष नहीं, AFG के 2 कबीले-1 पहाड़ के लिए 80 साल से लड़ रहे जंग

PAK से ही संघर्ष नहीं, AFG के 2 कबीले-1 पहाड़ के लिए 80 साल से लड़ रहे जंग

दुनिया भर में जहां एक तरफ देशों के बीच सरहदों और तेल के कुओं के लिए खूनी संघर्ष आम बात है, वहीं अफगानिस्तान के सुदूर इलाकों में एक ऐसा अनोखा और हैरान करने वाला युद्ध चल रहा है जो पिछले 80 दशकों से यानी करीब 8 दशक से लगातार जारी है। यह लड़ाई किसी दूसरे देश या विदेशी ताकत के खिलाफ नहीं है, बल्कि अफगानिस्तान के ही दो कबीलों के बीच सिर्फ एक पहाड़ के टुकड़े पर कब्जे को लेकर है। इस खूनी और लंबी दुश्मनी ने साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर जमीन और मान-सम्मान के मुद्दे कितने घातक साबित हो सकते हैं।

क्या है 80 साल पुरानी इस दुश्मनी की वजह?

यह अजीबोगरीब संघर्ष अफगानिस्तान के दो शक्तिशाली कबीलों के बीच एक ऐसे पहाड़ को लेकर है जो प्राकृतिक संसाधनों और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से उनके लिए बेहद अहम माना जाता है। पिछले 80 सालों से चली आ रही इस जंग में पीढ़ियां बदल चुकी हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच नफरत और संघर्ष की आग आज भी वैसी ही सुलग रही है। बुजुर्गों से शुरू हुई यह दुश्मनी अब युवाओं और बच्चों तक पहुंच चुकी है, जहां हर कोई अपने कबीले की आन-बान और शान के लिए हथियार उठाने को मजबूर है।

युद्ध का अंतहीन सिलसिला और भारी नुकसान

इन दोनों कबीलों के बीच पहाड़ों पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए हुई खूनी झड़पों में अब तक सैंकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इस अंतहीन संघर्ष के कारण न केवल दोनों पक्षों को भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान उठाना पड़ा है, बल्कि उस पूरे इलाके का विकास भी पूरी तरह ठप हो गया है। अफगान सरकार और स्थानीय बुजुर्गों द्वारा कई बार शांति समझौते और पंचायतें आयोजित करने के बावजूद इस पहाड़ के मालिकाना हक को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

अफगानिस्तान की अंदरूनी जटिलताओं का आईना

यह संघर्ष केवल दो कबीलों की आपसी रंजिश नहीं है, बल्कि यह अफगानिस्तान के जटिल सामाजिक ताने-बाने और जनजातीय संस्कृति की एक बानोई तस्वीर पेश करता है। जहां बाहरी ताकतों और पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान के साथ तनाव अपनी जगह है, वहीं देश के भीतर इस तरह के स्थानीय और पारंपरिक विवाद भी अफगानिस्तान की आंतरिक शांति और स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं। 80 साल से चल रही यह जंग इस बात का प्रमाण है कि देश के भीतरूनी घाव कितने गहरे हैं।

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