सीक्रेट प्लान 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी': ईरान को पूरी तरह से न्यूट्रलाइज करने की तैयारी में ट्रंप और नेतन्याहू
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से ही मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) की भू-राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ चुका है। इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जो साझा सैन्य अभियान शुरू किया है, उसने तेहरान की रातों की नींद उड़ा दी है। खुफिया रिपोर्टों और रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू मिलकर एक बेहद आक्रामक सैन्य और राजनीतिक ब्लूप्रिंट पर काम कर रहे हैं, जिसका एकमात्र उद्देश्य ईरान की कमर तोड़ना है।
इस महायोजना को अमेरिकी सैन्य हलकों में 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' (Operation Epic Fury) और इजरायल में 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' (Operation Roaring Lion) का कोडनेम दिया गया है。
ट्रंप के टारगेट पर हैं ईरान के ये 4 मुख्य गढ़
व्हाइट हाउस और तेल अवीव की इस साझा रणनीति के केंद्र में केवल ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही नहीं है, बल्कि उसके पूरे मिलिट्री इकोसिस्टम को ध्वस्त करना है। खुफिया दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे प्लान के तहत 4 बड़े लक्ष्यों को निशाना बनाया जा रहा है:
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परमाणु हथियारों की रेस पर पूर्ण विराम: इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु ठिकानों को नेस्तनाबूद करना चाहता है। ट्रंप का पहला मकसद ईरान को कभी भी परमाणु बम न बनाने देने की स्थिति में लाना है। इसमें हाल ही में सुर्खियों में आया 'पिकेक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) का अंडरग्राउंड ग्रेनाइट किला भी शामिल है, जिसे अमेरिकी बंकर-बस्टर मिसाइलों से उड़ाने की चेतावनी दी जा रही है。
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बैलिस्टिक मिसाइल का जखीरा तबाह करना: ईरान के पास दूर तक मार करने वाली घातक मिसाइलें हैं, जो इजरायल और अमेरिकी बेस के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। इस प्लान के तहत ईरान के मिसाइल उद्योगों और लॉन्चर्स को पूरी तरह से खाक करने का नक्शा तैयार किया गया है。
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ईरानी नौसेना (Navy) का सफाया: फारस की खाड़ी और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान के बढ़ते दबदबे और तेल टैंकरों पर होने वाले हमलों को रोकने के लिए उसकी नौसेना को समंदर में ही दफन करने की योजना है।
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प्रॉक्सी नेटवर्क (Axis of Resistance) को पंगु बनाना: लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हुथी और इराक के शिया लड़ाकों को मिलने वाली ईरानी फंडिंग और हथियारों की सप्लाई लाइन को जड़ से काटना इस प्लान का अहम हिस्सा है。
अंदरूनी तख्तापलट (Regime Change) का सबसे बड़ा दांव
इस सीक्रेट प्लान का सबसे खतरनाक पहलू केवल हवाई हमले नहीं, बल्कि ईरान के भीतर एक बड़ी राजनीतिक क्रांति की जमीन तैयार करना है। डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान की जनता से अपील करते हुए संकेत दिए हैं कि अमेरिकी-इजरायली सैन्य दबाव का फायदा उठाकर वे अपनी सरकार (इस्लामिक शासन) के खिलाफ खड़े हों और सत्ता अपने हाथों में लें。 ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सुरक्षा तंत्र को कमजोर कर वहां 'रेजीम चेंज' यानी तख्तापलट कराना ट्रंप प्रशासन का अंतिम गेमप्लान माना जा रहा है।
दबाव की राजनीति और बातचीत का आखिरी मौका
हालांकि, हालिया हफ्तों में भारी बमबारी और सैन्य टकराव के बाद दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत और सीजफायर के प्रयास भी परदे के पीछे चल रहे हैं। लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू लगातार वाशिंगटन पर यह दबाव बना रहे हैं कि ईरान पर से मिलिट्री प्रेशर कम न किया जाए, क्योंकि वे ईरान के किसी भी कूटनीतिक वादे पर भरोसा नहीं करते। यह सीक्रेट प्लान दरअसल 'प्रेशर-फर्स्ट' (पहले चौतरफा हमला और अत्यधिक दबाव) की नीति है, जो या तो ईरान को बिना शर्त आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर देगी या फिर पूरे मिडिल ईस्ट को एक ऐसे युद्ध में झोंक देगी जिसकी तपिश पूरी दुनिया महसूस करेगी。