ट्रंप-नेतन्याहू को ईरान की खुली धमकी: 'हमला हुआ तो खाड़ी के 7 बड़े ऑयल फील्ड्स कर देंगे तबाह'
मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में एक बार फिर युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं। ईरान ने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बेहद कड़े शब्दों में सीधी चेतावनी दी है। ईरान की ओर से कहा गया है कि यदि अमेरिका या इजरायल ने उसकी संप्रभुता पर हमला करने की हिमाकत की, तो वे क्षेत्र के सात सबसे प्रमुख और बड़े तेल क्षेत्रों (Oil Fields) को पूरी तरह से नष्ट कर देंगे। इस धमकी के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मच गया है।
खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर ईरान की नजर
ईरानी सैन्य कमांडरों और रणनीतिकारों की ओर से आए इस बयान में साफ किया गया है कि उनका निशाना सिर्फ इजरायल नहीं, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में फैले वे तेल क्षेत्र होंगे जो वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस रणनीति के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर चौतरफा आर्थिक दबाव बनाना चाहता है। अगर इन ऑयल फील्ड्स पर कोई आंच आती है, तो पूरी दुनिया में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा।
ट्रंप और नेतन्याहू की जुगलबंदी से बढ़ा तनाव
डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी सत्ता में वापसी के बाद से ही ईरान के खिलाफ वाशिंगटन और तेल अवीव का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। बेंजामिन नेतन्याहू पहले से ही ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की वकालत करते रहे हैं। ऐसे में ईरान ने इस संभावित गठबंधन को भांपते हुए 'पहले से रक्षात्मक' होने के बजाय आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। ईरान का यह बयान यह साफ करता है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब बेहद घातक और विनाशकारी आर्थिक युद्ध से देने के लिए तैयार है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया अभूतपूर्व संकट
अगर ईरान अपनी इस धमकी पर अमल करता है, तो इसका सीधा असर भारत सहित दुनिया के तमाम बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। खाड़ी देशों से होने वाली तेल सप्लाई बाधित होने से न केवल ईंधन के दाम आसमान छुएंगे, बल्कि माल ढुलाई और महंगाई दर भी बेकाबू हो जाएगी। रणनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि यह महज एक गीदड़भभकी नहीं है, बल्कि ईरान की ओर से एक सोची-समझी घेराबंदी है, जिससे वह अमेरिका और इजरायल को किसी भी सीधे सैन्य एक्शन से रोकने के लिए मजबूर कर सके। अब देखना यह होगा कि ट्रंप प्रशासन और नेतन्याहू इस खुली चुनौती का क्या जवाब देते हैं।