भारत के दो पड़ोसी सुलग उठे, बांग्लादेश में मजदूरों का विद्रोह, पाकिस्तान में बिजली-पानी के लिए कोहराम
दक्षिण एशिया के कूटनीतिक और भौगोलिक परिदृश्य से एक बेहद चिंताजनक और गंभीर खबर सामने आ रही है। भारत की सीमाओं से लगे दो प्रमुख पड़ोसी देश—बांग्लादेश और पाकिस्तान—इस वक्त भयंकर आंतरिक संकट और जन-असंतोष की आग में बुरी तरह सुलग रहे हैं। एक तरफ जहां बांग्लादेश में रेडीमेड गारमेंट (RMG) सेक्टर के लाखों मजदूर अपने न्यूनतम वेतन और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर उग्र सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान में बिजली के आसमान छूते बिलों, बदहाल अर्थव्यवस्था और पीने के पानी की भीषण किल्लत को लेकर जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। दोनों ही देशों में उपजे इस अभूतपूर्व मानवीय और आर्थिक संकट ने भारत सरकार और दक्षिण एशियाई रक्षा विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आइए जानते हैं कि भारत के इन दोनों पड़ोसियों में अचानक हालात इतने बेकाबू कैसे हो गए।
बांग्लादेश में रेडीमेड गारमेंट मजदूरों का हिंसक विद्रोह और आर्थिक पहिया थमा
बांग्लादेश की रीढ़ मानी जाने वाली गारमेंट इंडस्ट्री में काम करने वाले लाखों श्रमिकों का गुस्सा अब बेकाबू हो चुका है। देश के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों जैसे ढाका, गाजीपुर, आशुलीया और नारायणगंज में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। बुनियादी सुविधाओं की कमी, महंगाई के अनुपात में वेतन न बढ़ना और कारखाना मालिकों के अड़ियल रवैये के खिलाफ मजदूरों ने बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान कर दिया है। हजारों उग्र प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से ठप हो गए हैं। कई जगहों पर हिंसक झड़पें, वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों के बाद भी प्रदर्शनकारी हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे देश की पूरी निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
पाकिस्तान में गहराया बिजली-पानी का विकराल संकट, सड़कों पर उतरी आक्रोशित जनता
बांग्लादेश में अगर श्रम संकट गहराया है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान बुनियादी जीवन रक्षक संसाधनों के लिए तरस रहा है। पाकिस्तान के लगभग सभी प्रमुख शहरों—कराची, लाहौर, पेशावर और रावलपिंडी—में बिजली के भारी-भरकम बिलों और अघोषित घंटों की कटौती (लोड शेडिंग) ने आम नागरिकों का जीना दूभर कर दिया है। इसके साथ ही, साफ पीने के पानी की भारी कमी ने स्थिति को और भी विस्फोटक बना दिया है। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं और सरकारी विभागों के खिलाफ उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं। कराची और सिंध प्रांत के कई इलाकों में मुख्य सड़कों को जाम कर दिया गया है, जहां नागरिक 'बिजली-पानी नहीं तो टैक्स नहीं' के नारे लगा रहे हैं। पाकिस्तान का चरमराया हुआ बिजली ढांचा और खाली पड़ा खजाना इस संकट को सुलझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।
दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा पर इस दोहरे संकट का बड़ा असर
भारत के दोनों ओर स्थित पड़ोसी मुल्कों में एक साथ उपजी इस अराजकता ने पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में गारमेंट सेक्टर का ठप होना न केवल वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करेगा, बल्कि वहां बेरोजगारी और भुखमरी के नए दौर की शुरुआत कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान में आर्थिक बदहाली और गृह युद्ध जैसी स्थिति के कारण कट्टरपंथी ताकतों को शह मिलने का खतरा मंडरा रहा है। यदि दोनों देशों में हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो इसका सीधा असर क्षेत्रीय व्यापार, सीमा सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ना तय है।
भारत की सीमाओं पर बढ़ा अलर्ट और कूटनीतिक निगरानी
बांग्लादेश और पाकिस्तान में मच रहे इस भारी कोहराम को देखते हुए भारत सरकार और भारतीय सीमा सुरक्षा बल (BSF) पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गए हैं। बांग्लादेश सीमा पर अवैध घुसपैठ और शरणार्थियों के संभावित दबाव से निपटने के लिए गश्त बढ़ा दी गई है। वहीं, पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान की ओर से किसी भी प्रकार की दुस्साहसिक गतिविधि या आंतरिक अशांति का फायदा उठाकर आतंकी घुसपैठ कराने की कोशिशों को नाकाम करने के लिए सेना हाई अलर्ट पर है। विदेश मंत्रालय दोनों देशों की पल-पल बदलती स्थितियों पर बारीक नजर बनाए हुए है और स्थिति के अनुसार अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को तय कर रहा है।
आखिर क्या है इन दोनों देशों में उपजे असंतोष का स्थायी समाधान?
चाहे वह बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग हो या फिर पाकिस्तान का चरमराया हुआ ऊर्जा क्षेत्र, दोनों ही जगह संकट का मुख्य कारण प्रशासनिक विफलता, बेकाबू महंगाई और नीतिगत फैसलों में आम जनता की अनदेखी है। जब तक दोनों देशों की सरकारें अपने नागरिकों की बुनियादी जरूरतों, निष्पक्ष वेतन और निर्बाध जल-बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता नहीं देतीं, तब तक यह असंतोष थाम पाना संभव नहीं होगा। आने वाले दिन दोनों ही मुल्कों के भविष्य और पूरे क्षेत्र की शांति के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।