कमजोर नहीं है यूक्रेन; 800 से ज्यादा ड्रोन्स से दहल उठी मॉस्को की धरती, पुतिन के देश में भारी तबाही
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध अब एक बिल्कुल नए और खतरनाक चरण में पहुंच गया है। जो लड़ाई कभी सिर्फ सीमा तक सीमित थी वह अब रूस के अंदरूनी हिस्सों में लड़ी जा रही है।
रविवार को यूक्रेन ने रूस के कई अहम शहरों पर एक साथ सैकड़ों ड्रोन्स से धावा बोल दिया। इस बड़ी कार्रवाई का सीधा असर आम रूसी नागरिकों और वहां के रक्षा ढांचों पर पड़ रहा है। अब तक इस घटना में छह लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
रूसी राजधानी की ओर मुड़ा हमलों का रुख
रूसी रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार बीती रात आसमान में भारी तबाही का मंजर था। सेना ने कुल 822 यूक्रेनी ड्रोन्स को मार गिराने का दावा किया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग 600 ड्रोन सीधे राजधानी मॉस्को को निशाना बनाने के लिए भेजे गए थे। इस अप्रत्याशित खतरे को देखते हुए रूस के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है।
रोस्तोव और मॉस्को में जान-माल का नुकसान
हमलों का सबसे बुरा असर दक्षिण-पश्चिमी रोस्तोव इलाके में देखने को मिला। वहां के गवर्नर यूरी स्ल्यूसर ने पुष्टि की है कि तीन अलग-अलग शहरों में हुए धमाकों के कारण पांच लोगों की मृत्यु हो गई। वहीं मॉस्को क्षेत्र में भी एक दुखद घटना घटी। यहां एक रिहायशी मकान पर ड्रोन क्रैश हो गया जिसके चलते 83 साल के एक बुजुर्ग नागरिक की मौत हो गई।
समारा का अंतरिक्ष केंद्र बना निशाना
रविवार के इस भयानक हमले से ठीक एक दिन पहले शनिवार को भी यूक्रेन ने एक बड़ा स्ट्राइक किया था। इस बार दक्षिण-पश्चिमी समारा क्षेत्र के औद्योगिक ठिकानों को टारगेट किया गया। समारा के प्रमुख इवान नोस्कोव ने बताया कि सेना ने मिसाइल हमले को तो रोक दिया लेकिन शहर की कुछ फैक्ट्रियों को नुकसान पहुंचा है। घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने खुद सोशल मीडिया पर इस हमले की जिम्मेदारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेनी सेना ने समारा स्थित 'प्रोग्रेस सेंटर' को अपना लक्ष्य बनाया था। यह केंद्र रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकॉसमॉस का हिस्सा है और यहां रॉकेट तकनीक तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाए जाते हैं।
देशी मिसाइल 'फ्लेमिंगो' से किया वार
यूक्रेन की सैन्य ताकत में हाल के दिनों में भारी इजाफा हुआ है। प्रोग्रेस सेंटर पर हमले के लिए यूक्रेन ने खुद की बनाई 'फ्लेमिंगो' मिसाइल का उपयोग किया। यह जगह यूक्रेनी सीमा से 900 किलोमीटर दूर स्थित है। इसके अलावा युद्ध के मोर्चे से 700 किलोमीटर दूर सावास्लेइका एयरबेस पर भी बमबारी की गई। आमतौर पर यूक्रेनी हथियारों की पहुंच 200 किलोमीटर तक ही मानी जाती थी लेकिन इस साल उन्होंने लंबी दूरी तक मार करने की अद्भुत क्षमता हासिल कर ली है।
क्या है यूक्रेन की नई रणनीति?
पांचवें साल में प्रवेश कर चुके इस संघर्ष में यूक्रेन अब रूस की अर्थव्यवस्था और सेना की कमर तोड़ना चाहता है। रूसी सैन्य उद्योगों और ऊर्जा प्लांट पर लगातार हो रहे हमलों का मुख्य उद्देश्य मॉस्को की कमाई को रोकना है। जेलेंस्की का मानना है कि जब तक रूसी जनता युद्ध की विभीषिका को खुद महसूस नहीं करेगी तब तक शांति की स्थापना संभव नहीं है। इससे पहले 10 अगस्त को भी दोनों तरफ से भारी बमबारी हुई थी जिसमें जान-माल का काफी नुकसान हुआ था।