मिडटर्म में जीते तो क्या-क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप, हारे तो छीन ली जाएंगी कौन सी पावर्स?
अमेरिका की राजनीति में मिडटर्म चुनाव (Midterm Elections) को हमेशा राष्ट्रपति के कामकाज का सबसे बड़ा रिपोर्ट कार्ड और उनकी ताकत का लिटमस टेस्ट माना जाता है। जब डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन के सबसे पावरफुल पद पर बैठे हैं, तो दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मिडटर्म चुनाव के नतीजे अमेरिका और ट्रंप के राजनीतिक भविष्य की क्या दिशा तय करेंगे। अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों—प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) और सीनेट (Senate)—के चुनावी नतीजों पर ट्रंप की असली ताकत टिकी हुई है। यदि रिपब्लिकन पार्टी संसद पर अपना दबदबा बनाए रखती है तो ट्रंप के पास असीमित अधिकार और मनमुताबिक फैसले लेने की आजादी होगी। वहीं दूसरी ओर, यदि विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी बाजी मार लेती है, तो ट्रंप के पर काफी हद तक कतर दिए जाएंगे और उनसे कई महत्वपूर्ण विधायी व जांच संबंधी ताकतें छिन जाएंगी।
अगर रिपब्लिकन पार्टी जीती तो क्या-क्या करेंगे डोनाल्ड ट्रंप?
यदि मिडटर्म चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों में अपना बहुमत बरकरार रखने या बढ़ाने में कामयाब होती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप की ताकत दोगुनी हो जाएगी। ऐसी स्थिति में वे बिना किसी बड़े राजनीतिक रोड़े के अपने एजेंडे और नीतियों को लागू कर सकेंगे। ट्रंप के पास अमेरिका-मेक्सिको बॉर्डर की सुरक्षा, नए सख्त आव्रजन (Immigration) कानूनों को मंजूरी देने और घरेलू टैक्स में भारी कटौती करने के नए कानून पास कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा। इसके साथ ही, व्यापार युद्ध और सीमा शुल्क (Tariffs) के मामले में उन्हें और अधिक मजबूती मिलेगी।
संसद में अपनी पार्टी का दबदबा रहने पर ट्रंप अपने कई विवादित आर्थिक और कानूनी विधेयकों को संसद से आसानी से पारित करा लेंगे। इसके अलावा, विदेशी नीति के फैसलों, रक्षा बजट बढ़ाने और सुप्रीम कोर्ट व अन्य संघीय अदालतों में अपनी पसंद के conservative न्यायाधीशों और कैबिनेट अधिकारियों की नियुक्तियों को चुटकी में पूरा कर सकेंगे। एक तरह से रिपब्लिकन जीत ट्रंप को एक निरंकुश और बेहद शक्तिशाली राष्ट्रपति के रूप में काम करने की पूरी खुली छूट दे देगी।
अगर हारे तो राष्ट्रपति ट्रंप से छीन ली जाएंगी कौन सी पावर्स?
राजनीतिक सिक्का अगर दूसरी तरफ उछलता है और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी संसद के किसी भी एक या दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लेती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के विधायी अधिकारों पर ब्रेक लग जाएगा। अमेरिका में राष्ट्रपति भले ही देश का प्रमुख होता है, लेकिन कानून बनाने और बजट पारित कराने की असली ताकत संसद के पास ही होती है। यदि डेमोक्रेट्स हाउस या सीनेट जीत जाते हैं, तो ट्रंप की सबसे बड़ी ताकत—बिना रुकावट के कानून बनाने की पावर—पूरी तरह छीन जाएगी। वे अपनी पसंद का कोई नया कानून, टैक्स नीति या बजट संसद से आसानी से पास नहीं करा पाएंगे।
दूसरी सबसे बड़ी क्षति यह होगी कि डेमोक्रेटिक बहुमत वाली संसद के पास सरकारी मंत्रालयों और व्हाइट हाउस की जांच (Subpoena power) करने का अधिकार आ जाएगा। वे ट्रंप प्रशासन के पुराने विवादित फैसलों, विदेश नीति के फैसलों, उनके व्यापारिक सौदों और प्रशासनिक नीतियों की फाइलें खोल सकते हैं और उनके अधिकारियों को जवाबदेही के लिए कटघरे में खड़ा कर सकते हैं। इसके साथ ही, यदि सीनेट में डेमोक्रेट्स बहुमत में आते हैं, तो ट्रंप द्वारा की जाने वाली बड़ी सरकारी, न्यायिक या राजदूतों की नियुक्तियों को रोकने और खारिज करने का अधिकार भी डेमोक्रेट्स के हाथ में चला जाएगा।
महाभियोग (Impeachment) का लटकता खतरा और राजनीतिक घेराबंदी
डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद केवल नीतियां ही प्रभावित नहीं होंगी, बल्कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप पर महाभियोग (Impeachment) का बड़ा खतरा मंडराने लगेगा। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत मिलते ही डेमोक्रेट्स किसी भी प्रशासनिक उल्लंघन के आधार पर ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की ताकत हासिल कर लेंगे। हालांकि राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है जो बेहद मुश्किल होता है, फिर भी महाभियोग का मामला ट्रंप के बचे हुए दो साल के कार्यकाल को विवादों से भर देगा और उनके राजनीतिक प्रभुत्व को भारी नुकसान पहुंचाएगा।
इसके साथ ही, फंड जारी करने का अधिकार (Power of the Purse) अमेरिकी संसद के पास होता है। यदि संसद में विपक्षी पार्टी का कब्जा होता है, तो वे ट्रंप की महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए सरकारी फंड और रक्षा बजट रोकने की शक्ति का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में ट्रंप केवल अपने राष्ट्रपति पद के विशेषाधिकारों यानी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स (Executive Orders) और वीटो (Veto) पावर तक ही सीमित होकर रह जाएंगे, जिससे कोई भी नया बड़ा कानून बनाना उनके लिए असंभव हो जाएगा।
अमेरिकी राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
मिडटर्म चुनाव के इस संभावित उलटफेर का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका बड़ा असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। यदि ट्रंप संसद में अपनी ताकत खो देते हैं, तो वैश्विक व्यापार नीतियां, टैरिफ युद्ध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में अमेरिकी रुख अचानक बदल सकता है। जहां एक तरफ ट्रंप का प्रयास जीत हासिल कर अपने दूसरे कार्यकाल की छाप छोड़ने का होगा, वहीं डेमोक्रेट्स की जीत अमेरिका में 'डिवाइडेड गवर्नमेंट' (विभाजित सरकार) का दौर वापस ले आएगी। इस सूरत में व्हाइट हाउस और कैपिटल हिल (संसद) के बीच तीखा टकराव और कानूनी गतिरोध देखने को मिलेगा जो ट्रंप की राष्ट्रपति शक्तियों को सीमित कर देगा।