रूस ने अपने ही कच्चे तेल से बना पेट्रोल भारत से क्यों खरीदा, जानें कारण

रूस ने अपने ही कच्चे तेल से बना पेट्रोल भारत से क्यों खरीदा, जानें कारण

यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष के बीच रूस के ऊर्जा क्षेत्र में एक बेहद हैरान करने वाला कूटनीतिक और व्यापारिक घटनाक्रम सामने आया है। दुनिया भर में कच्चे तेल का बड़ा निर्यातक माना जाने वाला रूस अब खुद रिकॉर्ड स्तर पर पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करने को मजबूर हुआ है। इस साल अगस्त में रूस ने रिकॉर्ड 1.72 लाख टन पेट्रोलियम उत्पादों की खेप मंगाई है। इस कुल आयात में सबसे खास बात यह रही कि इसमें शामिल पेट्रोल भारत की धरती पर तैयार किया गया था।

यह पेट्रोल रूस से आए कच्चे तेल को ही प्रोसेस करके उस भारतीय रिफाइनरी में तैयार किया गया, जिसमें खुद रूस की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी 'रोसनेफ्ट' की बड़ी हिस्सेदारी है। यूक्रेन के निरंतर ड्रोन हमलों के कारण रूसी रिफाइनरियों की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होने के चलते मॉस्को को यह अप्रत्याशित कदम उठाना पड़ा है।

रूसी आयात में भारत का दबदबा: 70 फीसदी हिस्सेदारी के साथ 1.20 लाख टन पेट्रोल सप्लाई

अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (CREA) की ताजा मासिक रिपोर्ट में यह बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त महीने में रूस के कुल पेट्रोलियम आयात में अकेले भारत की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत दर्ज की गई। भारत ने अगस्त के दौरान रूस को 1.20 लाख टन पेट्रोल की सुरक्षित आपूर्ति की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 7.8 करोड़ यूरो आंकी गई है। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच तेल व्यापार अब केवल कच्चे तेल की खरीद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रिफाइंड उत्पादों की रिवर्स सप्लाई में भी बदल चुका है।

गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी से निकला पेट्रोल, नायरा और रोसनेफ्ट का कनेक्शन

सीआरईए की रिपोर्ट के अनुसार, रूस द्वारा अगस्त में आयात की गई तेल उत्पादों की यह कुल मात्रा पिछले सभी मासिक रिकॉर्ड्स से 7 गुना से भी अधिक रही और यह पूरे वर्ष 2025 में मंगाए गए कुल वॉल्यूम की तुलना में लगभग 3 गुना ज्यादा दर्ज की गई। भारत से रूस को भेजी गई पेट्रोल की यह पूरी खेप गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में स्थित वाडिनार रिफाइनरी में तैयार की गई थी। इस ईंधन को यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के दायरे में आने वाली कंपनी 'नायरा एनर्जी' ने सीधे रोसनेफ्ट को बेचा। उल्लेखनीय है कि रूसी सरकारी दिग्गज रोसनेफ्ट के पास नायरा एनर्जी में 49.13 प्रतिशत की भारी इक्विटी हिस्सेदारी मौजूद है।

घरेलू उत्पादन में आई भारी गिरावट: अपना कच्चा तेल भेजकर तैयार पेट्रोल मंगा रहा रूस

सीआरईए के गहन विश्लेषण के अनुसार, वर्ष 2026 के शुरुआती 8 महीनों के दौरान वाडिनार रिफाइनरी में प्रोसेस किया गया शत-प्रतिशत कच्चा तेल सीधे रूस से ही आयात किया गया था, जबकि 2025 में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत था। इसका सीधा व्यापारिक अर्थ यह निकलता है कि रूस अपने ही स्वामित्व वाली भारतीय रिफाइनरी को कच्चा तेल भेजकर वहां से पेट्रोल तैयार करवा रहा है, जिसे वह घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में उत्पादित करने में सक्षम नहीं हो पा रहा है। इसके बाद उसी परिष्कृत पेट्रोल को हजारों किलोमीटर दूर से जहाजों के जरिए वापस अपने देश मंगा रहा है ताकि घरेलू खपत की कमी को पूरा किया जा सके।

यूक्रेनी ड्रोन हमलों से बुनियादी ढांचा ध्वस्त, पेट्रोल आयात में 74% तक का उछाल

ऐतिहासिक रूप से रूस हमेशा से परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों (रिफाइंड फ्यूल) के सबसे बड़े वैश्विक निर्यातकों में शुमार रहा है। हालांकि, यूक्रेन द्वारा रूसी तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा केंद्रों पर किए गए लगातार सुनियोजित ड्रोन हमलों ने रूस के घरेलू रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे मॉस्को में गंभीर ईंधन संकट खड़ा हो गया। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि अगस्त महीने में रूस के कुल तेल उत्पाद आयात में अकेले पेट्रोल का हिस्सा 74 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि वर्ष 2023 से 2025 के बीच यह औसत आंकड़ा महज 6 प्रतिशत के आसपास हुआ करता था।