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लखनऊ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज 69वीं पुण्यतिथि हैं। इस मौके पर मैं आपको बता रहा हूं, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के कुचवाड़ा गांव में जन्मे ओशो रजनीश और महात्मा गांधी की मुलाकात के बारे में।

दूसरी मुलाकात का प्रसंग…

महात्मा गांधी और ओशो की दो बार मुलाकात हुई थी। ये प्रसंग दूसरी मुलाकात का है। खुद रजनीश ने इसका जिक्र किया था। यह ब्रिटिश इंडिया का वह दौर था, जब पूरे देश में स्वतंत्रता संग्राम उफान पर था। दादी के दिए तीन रुपए लेकर ओशो ट्रेन देखने के लिए स्टेशन आए थे, लेकिन यहां उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हो गई थी।

घंटों स्टेशन पर बैठकर किया ट्रेन का इंतजार

उस वक्त ओशो की उम्र करीब दस साल थी, उन्हें ट्रेन देखना था। वे स्टेशन पहुंच गए, उनकी जेब में दादी के दिए 3 रुपए थे। ट्रेन 30 घंटे लेट थी। स्टेशन से सारे लोग वापस जा चुके थे। पर ओशो वहीं बैठे रहे। स्टेशन मास्टर ने उन्हें टोका भी कि तुम सुबह से ही ट्रेन का इंतजार कर रहे हो। ट्रेन काफी लेट है, तुम चाहो तो घर जा सकते हो, लेकिन ओशो नहीं माने।

गांधी ने ओशो से कहा था रुपए दान करने को

काफी देर बाद जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, तो स्टेशन मास्टर ने ओशो को गांधी से मिलवाया। गांधीजी दान पेटी लिए हुए थे। ओशो की जेब में तीन रुपए थे। गांधीजी ने कहा-ये पैसे देश के गरीब लोगों के लिए इस पेटी में डाल दो। कुछ सवाल जवाब के बाद ओशो ने रुपए दान पेटी में डाल दिए। दरअसल, गांधीजी ने कहा था कि ये रुपए गरीब लोगों की मदद के लिए हैं।

रुपए डालने के बाद क्या हुआ?

ओशो ने पेटी में रुपए डाले और गांधीजी के हाथ से पेटी छीन ली। उन्होंने कहा मेरे गांव में बहुत गरीब हैं। मैं उनमें ये पैसे बांट दूंगा। हालांकि, थोड़ी देर बाद रजनीश ने पेटी लौटाते हुए कहा आप ही रख लीजिए, क्योंकि आप सबसे ज्यादा गरीब हैं, दरिद्र नारायण।

बक्सा छिनने पर कस्तूरबा ने क्या कहा था

इस दौरान गांधी जी के साथ कस्तूरबा भी मौजूद थीं। बा ने मजाक में कहा-आज आपको बराबरी का कोई मिला। अब इसने आपका पूरा बॉक्स ही ले लिया। ये बहुत अच्छा हुआ, क्योंकि हमेशा यह बक्सा ढोते-ढोते मैं थक गई हूं।

गांधी जी की मौत पर छिपकर रोए थे रजनीश

ओशो महात्मा गांधी के बहुत बड़े आलोचक माने जाते थे। कहा जाता है कि जिस दिन गांधीजी की हत्या हुई, उस दिन वह छिपकर रोए थे। उनका कहना था कि वह एक ईमानदार व्यक्ति थे।

फोटो : फाइल।

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