Up kiran,Digital Desk : इस शहर की रफ्तार बहुत तेज़ है, पर इंसानियत शायद कहीं पीछे छूट गई है। यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि दिल्ली की वो रूह कंपा देने वाली सच्चाई है, जहां एक कैब ड्राइवर को सिर्फ एक मोबाइल फोन के लिए चाकुओं से गोद दिया गया, और वो 7-8 घंटे तक सर्दी में, खुले आसमान के नीचे, खून से लथपथ पड़ा तड़पता रहा। गाड़ियां गुज़रती रहीं, लोग देखते रहे होंगे, पर किसी ने उसकी मदद के लिए एक फोन तक नहीं किया।
जब तक सुबह हुई और पुलिस पहुंची, अयोध्या के रहने वाले 28 साल के रामसिंह की सांसे हमेशा के लिए थम चुकी थीं।
कौन था रामसिंह?
यह कहानी है रामसिंह की, जो अयोध्या से दिल्ली अपने सपनों और परिवार का पेट पालने आया था। उसकी अपनी टैक्सी थी, लेकिन कमाई इतनी नहीं थी कि सिर पर एक छत का जुगाड़ कर सके। वो इतना गरीब था कि कड़ाके की ठंड में भी रात को अपनी कैब में ही सो जाया करता था।
उस काली रात में क्या हुआ था?
बुधवार की रात करीब 11 बजे, रामसिंह बारापूला के पास निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से कुछ दूर शौच के लिए गया था। वहीं उसे चार दरिंदों ने घेर लिया, जिनमें से तीन नाबालिग (बच्चे) थे। उनका मकसद था रामसिंह का मोबाइल और पैसे लूटना।
रामसिंह ने जब इसका विरोध किया, तो उन चारों ने उस पर चाकुओं से हमला कर दिया। 7 से 8 बार चाकुओं से वार करके उसे वहीं लहूलुहान हालत में छोड़ दिया और उसका मोबाइल और पैसे लूटकर भाग गए।
और फिर... 8 घंटों तक चली मौत से जंग
यहां से इंसानियत के मरने की कहानी शुरू होती है। रामसिंह अकेले, अंधेरे में, खून से लथपथ, 8 घंटे तक पड़ा रहा। वह मदद के लिए चीखा होगा, उसने किसी से उम्मीद लगाई होगी, पर कोई नहीं रुका। सुबह जब किसी राहगीर ने पुलिस को सूचना दी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पुलिस अधिकारियों ने भी माना, "अगर किसी ने समय पर सूचना दे दी होती, तो शायद उसकी जान बच जाती।"
कैसे पकड़े गए गुनहगार?
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले गए, जिसमें ये चारों आरोपी साफ दिख गए। पुलिस ने फौरन एक बालिग आरोपी, इमरान, और तीन नाबालिगों को पकड़ लिया। इमरान पर पहले से ही कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, और अब वह इन बच्चों को भी जुर्म की दुनिया में घसीट रहा था।
यह घटना सिर्फ एक लूट या हत्या नहीं है। यह इस समाज के चेहरे पर एक तमाचा है, जो पूछता है कि हम इतने संवेदनहीन कैसे हो गए कि किसी को अपनी आंखों के सामने मरता हुआ छोड़ सकते हैं?




