Up Kiran, Digital Desk: कोरबा जिले के अभिषेक आदिले और बबीता देवांगन की शादी न सिर्फ उनके परिवारों के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है। यह शादी उस बदलाव का हिस्सा है जो सरकार द्वारा जाति व्यवस्था और भेदभाव को समाप्त करने के लिए की गई कोशिशों के परिणामस्वरूप सामने आई है।
अभिषेक आदिले, जो कि अनुसूचित जाति से आते हैं, और बबीता देवांगन, जो ओबीसी वर्ग से हैं, ने समाज की पुरानी और जटिल सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए एक-दूसरे से विवाह किया। इन दोनों ने समाज के सामने यह साबित कर दिया कि जातिवाद को चुनौती देने का समय आ चुका है।
सरकारी सहायता से मिली आर्थिक सुरक्षा
यह विवाह सिर्फ सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नहीं था, बल्कि दोनों को सरकार की अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत 2.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी मिली। इसमें से 1 लाख रुपये तुरंत उनके संयुक्त खाते में डाले गए, जबकि बाकी 1.5 लाख रुपये तीन साल की सावधि जमा के रूप में सुरक्षित कर दिए गए। इस वित्तीय मदद ने न केवल उनके जीवन को स्थिरता दी, बल्कि उनके भविष्य को भी सुरक्षित किया।
सरकार की योजना: सामाजिक एकता का कदम
सरकार की यह पहल केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बड़ा उद्देश्य है – जातीय भेदभाव को समाप्त करना, समाज में समानता को बढ़ावा देना, और युवाओं को मानसिकता के पुराने बंधनों से मुक्त करना। यह योजना सामाजिक समरसता और प्रेम को बढ़ावा देती है, जिससे समाज में नए बदलाव की उम्मीद जगी है।
अभिषेक और बबीता: समाज में बदलाव की उम्मीद
यह दंपत्ति न केवल अपने परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं, बल्कि उन्होंने यह भी साबित किया है कि विश्वास और साहस से जाति की दीवारें गिराई जा सकती हैं। चार साल पहले शादी के बंधन में बंधने वाले इस जोड़े ने न केवल अपने रिश्ते को स्थापित किया, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि सरकारी योजनाएं तब असरकारक होती हैं जब समाज उन्हें अपनाता है और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाता है।
इस कदम से यह साबित हुआ कि जब समाज में जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ प्रयास किए जाते हैं, तो न केवल व्यक्ति, बल्कि पूरी समाज की सोच बदल सकती है।
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