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Up kiran,Digital Desk  असम विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से ठीक पहले मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक बयान ने देशभर की राजनीति में भूचाल ला दिया है। गोमांस (बीफ) के सेवन को लेकर दिए गए उनके ताजा बयान पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश ने सीधे तौर पर नारा दिया है— 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'। विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा गाय के मुद्दे पर दोहरा मापदंड अपना रही है।

हिमंत बिस्वा सरमा का वो बयान, जिस पर मचा बवाल

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि गोमांस खाने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसे निजी दायरे तक सीमित रखा जाना चाहिए। सरमा ने कहा, "मुस्लिम भाई गोमांस खाते हैं, हम उन्हें मना नहीं कर रहे हैं। हमारा बस इतना कहना है कि इसे घर के अंदर खाएं, सार्वजनिक स्थानों पर नहीं। मंदिरों के 5 किलोमीटर के दायरे में या किसी भी पब्लिक प्लेस पर इसका सेवन नहीं होना चाहिए।"

अखिलेश यादव का पलटवार: 'गौमाता बचाओ' का नारा

मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी खेमे में आक्रोश फैल गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर हिमंत बिस्वा सरमा के बयान वाला एक पोस्टर साझा किया और लिखा— 'भाजपा हटाओ, गौमाता बचाओ'। अखिलेश यादव ने इशारों-इशारों में भाजपा पर निशाना साधते हुए इसे राजनीति का सबसे निचला स्तर और आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।

बदलते बयानों ने बढ़ाई उलझन, विपक्ष ने कहा 'चुनावी हथकंडा'

हैरानी की बात यह है कि यह बयान मुख्यमंत्री के पुराने रुख से बिल्कुल उलट है। कुछ ही दिन पहले जोरहाट की रैली में सरमा ने चेतावनी दी थी कि गाय का मांस खाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने तब असम पशु संरक्षण कानून का हवाला देते हुए 3 साल की जेल की बात कही थी।

अब आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इस पर भाजपा को घेरा है। 'आप' ने आरोप लगाया कि उत्तर भारत में भाजपा गाय के नाम पर राजनीति करती है और वहां के लोग 'गौ रक्षा' के नाम पर हिंसक हो जाते हैं, जबकि असम में उनके मुख्यमंत्री खुद घर में गोमांस खाने की 'इजाजत' दे रहे हैं।

क्या कहता है असम का कानून?

असम पशु संरक्षण अधिनियम 2021 के अनुसार, राज्य में गायों के वध पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इसके लिए कड़े नियम हैं। कानून के मुताबिक मंदिरों के आसपास, सार्वजनिक स्थलों, रेस्तरां और सामुदायिक आयोजनों में गोमांस का सेवन प्रतिबंधित है। हालांकि, दुकानों से बीफ खरीदना और निजी स्थानों पर इसका सेवन करना कानूनी दायरे में आता है। चुनाव से ठीक पहले इस मुद्दे पर छिड़ी बहस ने असम के सियासी समीकरणों को गर्मा दिया है।