Up Kiran, Digital Desk: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने शनिवार को बीजेपी और निर्वाचन आयोग पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर कोई सामान्य काम नहीं बल्कि सोची समझी रणनीति है। इसका मकसद लाखों लोगों का वोटिंग का हक छीनना है।
सपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अखिलेश ने गुस्से भरे लहजे में पूछा कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों है। प्रदेश में शादियां चल रही हैं। लोग व्यस्त हैं। फिर भी पूरा उत्तर प्रदेश का एसआईआर एक साथ क्यों कराया जा रहा है। उनका साफ आरोप था कि चुनाव आयोग और सत्ताधारी पार्टी मिलकर खेल कर रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने तो यहां तक कह डाला कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने जो संवैधानिक अधिकार हमें दिया उसे छीना जा रहा है। सिर्फ वोट ही नहीं बल्कि आरक्षण और पहचान पर भी खतरा मंडरा रहा है। एक बार फॉर्म रिजेक्ट हुआ तो नाम कट गया समझो।
अखिलेश यह बातें उस वक्त कह रहे थे जब वह मृत बीएलओ विजय कुमार वर्मा के परिवार को दो लाख रुपये की मदद का चेक सौंप रहे थे। विजय कुमार शिक्षा मित्र थे। 14 नवंबर की रात एसआईआर का काम करते वक्त अचानक कुर्सी से गिर पड़े। अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने ब्रेन स्ट्रोक बताया और कुछ घंटों में मौत हो गई।
परिवार का दर्द सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मृतक की पत्नी रोते हुए बता रही थीं कि प्रशासन वाले झूठ बोल रहे हैं कि वह ड्यूटी पर नहीं थे। स्कूल वालों पर भी दबाव डाला जा रहा है कि पहले से बीमार थे। अखिलेश ने तुरंत ऐलान किया कि सपा की तरफ से दो लाख रुपये की मदद दी जा रही है। साथ ही मांग की कि सरकार एक करोड़ रुपये दे। परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दे और सभी सरकारी योजनाओं से जोड़े।
अखिलेश ने तंज कसा कि फॉर्म बांटने का काम तो नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों को सौंप दिया गया। सरकार कह रही है सारे फॉर्म बंट गए लेकिन जमीनी हकीकत बिलकुल अलग है। कई इलाकों में लोग आज भी फॉर्म भरने के लिए भटक रहे हैं।
साफ दिख रहा है कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी किसी भी कीमत पर विपक्ष के वोटरों को कम करना चाहती है। अखिलेश यादव ने चेतावनी दी है कि जनता यह खेल समझ चुकी है और इसका जवाब वोट से देगी।
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