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Up kiran,Digital Desk : सर्दियों का मौसम शुरू होते ही लगभग हर घर में माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। बच्चों का बार-बार छींकना, खांसी, बंद नाक या हल्का बुखार... ये सब देखकर मन में एक ही सवाल उठता है- कहीं मेरा बच्चा कमजोर तो नहीं? क्या मैंने उसे ठीक से गर्म कपड़े नहीं पहनाए?

अगर आपके मन में भी ऐसे ही सवाल आते हैं, तो आप अकेले नहीं हैं। डॉक्टरों का मानना है कि बच्चों का कभी-कभी बीमार पड़ना उनकी इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को मजबूत बनाने का एक doğal तरीका है। लेकिन अगर आपका बच्चा बार-बार बीमार पड़ रहा है, तो आपको थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। चलिए जानते हैं कुछ आसान लेकिन असरदार तरीके, जिनसे आपका बच्चा इस मौसम में स्वस्थ और खुश रहेगा।

आखिर सर्दियों में ही क्यों बार-बार बीमार पड़ते हैं बच्चे?

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, ठंड सीधे तौर पर बीमारी का कारण नहीं बनती, बल्कि यह कीटाणुओं के पनपने और फैलने के लिए एक आदर्श माहौल बनाती है।

  • बंद जगहों पर संक्रमण: सर्दियों में बच्चे स्कूल, डे-केयर या घर जैसी बंद जगहों पर ज्यादा समय बिताते हैं, जिससे एक-दूसरे से कीटाणु फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
  • कमजोर होती पहली ढाल: ठंडी और सूखी हवा नाक के अंदर की नमी को सुखा देती है। यह नमी कीटाणुओं से लड़ने वाली पहली ढाल होती है, जिसके सूखने पर वायरस आसानी से शरीर में घुस जाते हैं।
  • विकसित होती इम्यूनिटी: बच्चों की इम्यूनिटी अभी विकसित हो रही होती है। वे ज्यादातर वायरस के संपर्क में पहली बार आते हैं, इसलिए वे वयस्कों की तुलना में जल्दी और ज्यादा बार बीमार पड़ते हैं।

सावधानियां: बीमारियों को कहें 'No Entry'

सर्दी-जुकाम से 100% बचना तो मुमकिन नहीं, लेकिन कुछ सावधानियां बरतकर आप इसके खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। मजबूत इम्यून सिस्टम ही बीमारियों से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।

  • विटामिन C है सुपरहीरो: यह सर्दी-जुकाम से लड़ने में सुपरहीरो का काम करता है। बच्चों को रोजाना संतरा, आंवला, कीवी और स्ट्रॉबेरी जैसे फल खिलाएं।
  • जिंक देगा ताकत: बादाम, अखरोट, काजू जैसे सूखे मेवे और कद्दू या सूरजमुखी के बीज खिलाएं। दालें भी जिंक का बेहतरीन स्रोत हैं।

सर्दियों में वायरस लंबे समय तक जिंदा रहते हैं, इसलिए सफाई बहुत जरूरी है।

  • हाथों की धुलाई: बच्चों को सिखाएं कि खाना खाने से पहले और बाहर से आने के बाद कम से-कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं।
  • चेहरे को न छुएं: बच्चों को बार-बार अपनी आंख, नाक और मुंह छूने से रोकें, क्योंकि कीटाणु इन्हीं रास्तों से शरीर में दाखिल होते हैं।

सिर्फ मोटे कपड़े पहनाना काफी नहीं है, सही तरीका अपनाना जरूरी है।

  • लेयरिंग है बेस्ट: एक मोटा कपड़ा पहनाने की जगह, कई पतले-पतले गर्म कपड़ों की परतें पहनाएं। इससे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकलती।
  • सिर और पैर रखें गर्म: बाहर जाते समय बच्चे को टोपी, मफलर और जुराब जरूर पहनाएं।
  • ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल: हीटर चलाने से घर की हवा रूखी हो जाती है। हवा में नमी बनाए रखने के लिए ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें। नम हवा में वायरस कम सक्रिय होते हैं।

सर्दियों में बच्चे पानी कम पीते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है।

  • गुनगुना पानी दें: बच्चों की बोतल में हमेशा गुनगुना पानी भरकर रखें।
  • सूप और हर्बल चाय: ताजी सब्जियों का गर्म सूप और अदरक-शहद वाली हर्बल चाय न सिर्फ शरीर को गर्म रखती है, बल्कि इम्यूनिटी भी बढ़ाती है।

नींद के दौरान ही शरीर अपनी मरम्मत करता है और बीमारियों से लड़ने की ताकत इकट्ठा करता है। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से पूरी और बिना रुकावट की नींद ले।

बच्चों के डॉक्टर की 5 सलाहें जो आएंगी बहुत काम

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार के अनुसार, ये 5 बातें हर माता-पिता को ध्यान में रखनी चाहिए:

  1. डाइट बदलें: मौसम बदलते ही बच्चों के खाने में मौसमी फल और सब्जियां शामिल करें।
  2. पानी पिलाते रहें: बच्चों को गुनगुना पानी और गर्म पेय पदार्थ देते रहें।
  3. अतिरिक्त कपड़े पहनाएं: बाहर जाते समय हमेशा एक अतिरिक्त परत कपड़े की पहनाएं और सिर-पैर ढककर रखें।
  4. संक्रमित लोगों से दूर रखें: अगर घर में कोई बीमार है, तो बच्चे को उससे दूर रखें।
  5. भीड़ से बचाएं: बच्चों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें, क्योंकि वहां संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है।