UP Kiran,Digital Desk: करनाल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला पर आरोप है कि उसने नाबालिग लड़के को किडनैप कर उसे अपने साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने पर मजबूर किया। इसके अलावा, महिला ने दस्तावेजों में हेरफेर कर न केवल नाबालिग युवक को अपने दो बच्चों का पिता बना दिया, बल्कि उसकी उम्र भी बदल दी, ताकि वह कानूनी रूप से बालिग नजर आए। युवक के पिता का कहना है कि उनके बेटे का जन्म 2001 में हुआ था, जबकि महिला के बच्चों की जन्मतिथि 2007 और 2014 है, जो इस पूरे मामले को और संदिग्ध बनाता है। महिला के द्वारा किए गए दस्तावेज़ी बदलाव के कारण, 2007 में लड़के की उम्र केवल छह साल थी, लेकिन महिला ने उसे 2019 में अपने बच्चों का पिता बना दिया।
कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का दिया आदेश
घरौंडा कोर्ट ने अब आरोपी महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी महिला की तलाश की जा रही है। इस आदेश ने यह साबित कर दिया है कि सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि ऐसे मामलों में न्याय मिल सके और अपराधियों को सजा दिलाई जा सके।
लापता बेटे की खोज में परेशान परिवार
राजबीर सिंह, जो कुरुक्षेत्र के खेड़ी मारकंडा गांव के रहने वाले हैं, ने बताया कि जून 2019 में उनका 17 वर्षीय बेटा अचानक लापता हो गया। इसके बाद, उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि उनका बेटा सोनीपत के गांव बई की मीनाक्षी देवी के द्वारा किडनैप किया गया था। महिला ने न केवल लड़के को किडनैप किया, बल्कि उसे अपने साथ रहने के लिए भी मजबूर किया और एक लिव-इन रिलेशनशिप में शामिल कर लिया।
धांधली और फर्जी दस्तावेज़ी काम
राजबीर सिंह का कहना है कि महिला ने नाबालिग की जन्मतिथि बदलवाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए। इसके तहत उसने यह दावा किया कि लड़का अपनी मर्जी से उसके साथ रह रहा है, जबकि असल में वह नाबालिग था। महिला ने 'परिवार पहचान पत्र' (PPP) में भी हेरफेर की, जहां बेटे की जन्मतिथि 2001 से बदलकर 1991 करा दी गई, जिससे वह 2019 में बालिग दिखाई दे सके। इस तरह के धोखाधड़ी के मामलों ने समाज में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां कानून की कमी और दस्तावेजी हेरफेर का प्रभाव देखा जा सकता है।
क्या इसके बाद मिलेगा न्याय?
राजबीर सिंह ने बताया कि महिला के पहले पति से दो बच्चे भी हैं, जिनकी उम्र 2007 और 2014 के बीच की है। इन बच्चों का पिता भी उनके बेटे को ही दिखा दिया गया। इसके बावजूद, पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी। इस पूरे मामले को लेकर परिवार ने न्याय की उम्मीद में अदालत का दरवाजा खटखटाया, और अब कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, अब देखने वाली बात यह होगी कि पुलिस महिला को पकड़ने में कितनी जल्दी काम करती है और क्या उसे सजा मिलती है या नहीं।




