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Up kiran,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को दहला दिया है, लेकिन इसका सबसे घातक असर दक्षिण एशिया के उन देशों पर पड़ा है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण 'स्ट्रैट ऑफ होर्मुज' से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई ठप पड़ने से मालदीव, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाएं वेंटिलेटर पर आ गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिन देशों ने हाल के वर्षों में 'इंडिया आउट' और 'बॉयकॉट इंडिया' जैसे अभियानों के जरिए भारत से बगावत की थी, आज वही देश संकट की घड़ी में भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं। भारत ने भी अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति का परिचय देते हुए पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर मदद का हाथ बढ़ाया है।

मालदीव: 'गो बैक इंडिया' से 'थैंक यू इंडिया' तक का बदलाव

नवंबर 2023 में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कट्टर भारत-विरोधी रुख अपनाते हुए सत्ता हासिल की थी। उन्होंने भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस भेजकर और चीन के साथ रक्षा समझौते कर नई दिल्ली को कड़ी चुनौती दी थी। मालदीव के मंत्रियों ने भारतीय प्रधानमंत्री पर अभद्र टिप्पणियां तक की थीं, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में अभूतपूर्व गिरावट आई थी।

भारत ने कैसे की मदद?

फरवरी 2026 के युद्ध के बाद जब मालदीव में पेट्रोल-डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का स्टॉक खत्म होने लगा, तो चीन से मदद न मिलने पर मुइज्जू सरकार ने भारत से गुहार लगाई। भारत ने कूटनीतिक बड़प्पन दिखाते हुए न केवल आवश्यक वस्तुओं का निर्यात जारी रखा, बल्कि आपातकालीन कोटे से पेट्रोल और एटीएफ की विशेष खेप भेजी ताकि मालदीव का पर्यटन उद्योग पूरी तरह ठप न हो जाए।

बांग्लादेश: ऊर्जा संकट में पाइपलाइन बनी 'लाइफलाइन'

अगस्त 2024 के सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश में 'बॉयकॉट इंडिया' अभियान ने जोर पकड़ा था। अंतरिम सरकार के दौरान भारत के साथ हुए बिजली समझौतों की समीक्षा की धमकियां दी गईं और सीमा विवाद को लेकर आक्रामक बयानबाजी हुई। यूनुस सरकार ने पाकिस्तान और चीन से करीबी बढ़ाकर भारत की सुरक्षा चिंताओं को नजरअंदाज किया था।

युद्ध के कारण गैस की किल्लत से बांग्लादेश का पावर ग्रिड फेल होने की कगार पर है। बांग्लादेश की 95% तेल निर्भरता खाड़ी देशों पर है, जो अब बाधित है। ऐसे में भारत ने नुमालीगढ़-पार्वतीपुर 'मैत्री पाइपलाइन' के जरिए हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति बढ़ा दी है।

10 मार्च 2026: 5,000 टन डीजल भेजा गया।

आगामी योजना: इस महीने कुल 40,000 टन अतिरिक्त डीजल भेजने का लक्ष्य है।

बिजली: भारतीय पावर ग्रिड से होने वाली बिजली सप्लाई को भी बिना किसी बाधा के जारी रखा गया है।

श्रीलंका: संकट के समय फिर खड़ा हुआ 'पुराना दोस्त'

वर्तमान स्थिति: 2022 के आर्थिक संकट से उबर रहे श्रीलंका को 2026 के इस तेल झटके ने फिर से अस्थिर कर दिया है। राष्ट्रपति दिसानायके ने प्रधानमंत्री मोदी से फोन पर बात कर तत्काल ईंधन की मांग की थी।

भारत का कदम: भारत ने 28 मार्च 2026 को 38,000 मीट्रिक टन ईंधन (20,000 MT डीजल और 18,000 MT पेट्रोल) का शिपमेंट कोलंबो भेज दिया। राष्ट्रपति दिसानायके ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर का आभार व्यक्त करते हुए इसे 'त्वरित समर्थन' बताया।