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Up Kiran, Digital Desk: हिंदू संत समाज के भीतर विवादों के बीच बाबा रामदेव ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जहां देश और सनातन धर्म के खिलाफ कई ताकतें सक्रिय हैं, वहीं हमें आपस में लड़ने के बजाय एकजुट होकर अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करना चाहिए। बाबा रामदेव ने गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में यह भी बताया कि गायों की रक्षा की जिम्मेदारी हर हिंदू की है और इसे केवल नारेबाजी से नहीं, बल्कि ठोस प्रयासों से बचाया जा सकता है।

संतों को आपस में विवाद से बचने की सलाह

बाबा रामदेव ने माघ मेला में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि संतों को आपस में विवाद करने की बजाय, समाज के बीच एकता का संदेश देना चाहिए। उन्होंने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी स्थितियां कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकतीं। रामदेव ने साफ कहा कि, “हमारे समाज में पहले से ही कई शक्तियां हैं जो सनातन धर्म और भारत को नुकसान पहुँचाना चाहती हैं। ऐसे में हम नहीं चाहते कि हमारे संतों में भी आपस में कोई विवाद हो।”

गायों की रक्षा: हर हिंदू की जिम्मेदारी

बाबा रामदेव ने यह भी जोर दिया कि गायों की रक्षा हम सभी हिंदुओं की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि गायों को बचाने के लिए सिर्फ नारेबाजी से काम नहीं चलेगा। हमें गायों की देखभाल करनी होगी और इसके लिए संतों और समाज के लोगों को आगे आकर 5-10 हजार गायों की देखभाल करनी चाहिए। बाबा ने यह उदाहरण भी दिया कि उनका संगठन पतंजलि पीठ एक लाख गायों की देखभाल कर रहा है और उन्होंने शंकराचार्यों से भी अपील की कि वे अपने आश्रमों में गायों की देखभाल करें।

विवाद से परे एकता की आवश्यकता

रामदेव ने इस बात पर जोर दिया कि सनातनी समाज को आपस में लड़ने के बजाय एकजुट होना चाहिए। उनका कहना था कि ऐसे समय में जब हमारे देश में कई विदेशी ताकतें सनातन धर्म के खिलाफ सक्रिय हैं, हमें आपस में मतभेदों से दूर रहकर एकजुटता का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। रामदेव ने यह भी कहा कि हमें अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए अहंकार और विवादों से दूर रहकर एक सकारात्मक दिशा में काम करना चाहिए।