Up kiran,Digital Desk : आज 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे ब्रह्म मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान बदरीविशाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। इस वर्ष मंदिर को 15 क्विंटल से अधिक फूलों से सजाया गया है और पहले ही दिन हजारों भक्तों ने दर्शन किए।
यदि आप भी इस वर्ष बदरीनाथ धाम की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो दर्शन के समय, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और नए नियमों को जानना बेहद जरूरी है।
बदरीनाथ धाम: दर्शन की समय सारणी (Darshan Timings)
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रशासन ने दर्शन का समय निर्धारित किया है:
प्रातःकाल (निर्माल्य दर्शन): सुबह 04:30 बजे से 06:30 बजे तक।
सामान्य दर्शन (सुबह): सुबह 06:30 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक।
विश्राम काल: दोपहर 01:00 बजे से शाम 04:00 बजे तक (इस दौरान मंदिर बंद रहता है)।
शाम के दर्शन: शाम 04:00 बजे से रात 09:00 बजे तक।
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन (How to Register)
बिना रजिस्ट्रेशन के यात्रा की अनुमति नहीं है। दर्शन के लिए QR कोड वाला ई-पास अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन के 4 आसान तरीके हैं:
वेबसाइट: registrationandtouristcare.uk.gov.in पर जाकर ऑनलाइन फॉर्म भरें।
व्हाट्सएप: मोबाइल नंबर +91-8394833833 पर 'YATRA' लिखकर भेजें।
मोबाइल ऐप: 'Tourist Care Uttarakhand' ऐप डाउनलोड करें।
ऑफलाइन: ऋषिकेश, हरिद्वार, सोनप्रयाग और पांडुकेश्वर में बने काउंटरों से पास बनवाएं।
यात्रा के नए और जरूरी नियम
इस वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा और मर्यादा बनाए रखने के लिए कुछ कड़े नियम लागू किए हैं:
गैर-हिंदुओं के लिए नियम: बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में प्रवेश के लिए गैर-हिंदुओं को सनातन धर्म में आस्था का शपथ पत्र देना होगा। गंगोत्री में पंचगव्य सेवन की शर्त रखी गई है।
मोबाइल और कैमरा बैन: मंदिर परिसर के भीतर फोटो खींचना या वीडियो बनाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
वाहन नियम: यदि आप निजी वाहन से आ रहे हैं, तो greencard.uk.gov.in से 'ग्रीन कार्ड' प्राप्त करना अनिवार्य है। पहाड़ी रास्तों पर रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक ड्राइविंग प्रतिबंधित है।
यात्रियों के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा सलाह
ठंड से बचाव: अप्रैल-मई में भी बदरीनाथ में तापमान 5°C से नीचे रहता है, इसलिए पर्याप्त ऊनी कपड़े साथ रखें।
एक्यूलाइजेशन (Accclimatization): बदरीनाथ 10,279 फीट की ऊंचाई पर है। ऑक्सीजन की कमी से बचने के लिए जोशीमठ में एक रात रुककर शरीर को ऊँचाई के अनुकूल ढालने की सलाह दी जाती है।
दस्तावेज: यात्रा के दौरान अपना पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट) और रजिस्ट्रेशन का प्रिंट आउट हमेशा साथ रखें।




