Up kiran,Digital Desk : सर्दियों के आते ही खेतों में हरियाली छा जाती है, और इसी हरियाली का एक खास हिस्सा है बथुआ। ये हरी पत्तेदार सब्जी सिर्फ खेतों में यूँ ही उग जाती है, पर इसमें छिपे हैं सेहत के अनमोल खज़ाने। बथुआ विटामिन A, C, K और कई तरह के B-विटामिन्स से भरपूर होता है, जो आँखों की रौशनी, त्वचा को चमकदार बनाने, इम्यूनिटी को मजबूत करने और मेटाबॉलिज्म को ठीक रखने में मदद करते हैं।
सिर्फ यही नहीं, इसमें आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे ज़रूरी मिनरल्स भी खूब होते हैं, जो हड्डियों को ताक़त देते हैं, खून को बढ़ाने में मदद करते हैं और दिल की सेहत का ख्याल रखते हैं। बथुआ में फाइबर भी भरपूर होता है, जो पेट को दुरुस्त रखता है, कब्ज़ को दूर भगाता है और शरीर से गंदगी (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने का काम करता है।
आम तौर पर हरी सब्ज़ियों में प्रोटीन कम होता है, पर बथुआ प्रोटीन का एक अच्छा सोर्स है, जो शरीर की कमज़ोरी को दूर करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो शरीर की सूजन कम करते हैं और हमें बीमारियों से बचाते हैं।
पर रुकिए! ये सुपर सब्ज़ी सबके लिए नहीं
हालांकि बथुआ सेहत के लिए बहुत फ़ायदेमंद है, लेकिन कुछ बीमारियों में इसका सेवन ज़हर के समान साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें ऑक्सेलेट्स नामक तत्व ज़्यादा मात्रा में होते हैं। ब्लॉक-लेवल हॉस्पिटल में आयुष चिकित्सा अधिकारी, डॉ. अशोक कुमार सिंह, बताते हैं कि कुछ खास बीमारियों में बथुआ खाने से मरीज़ के लक्षण और भी बिगड़ सकते हैं।
तो चलिए, जानते हैं एक्सपर्ट की सलाह से कि बथुआ का सेवन किन लोगों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है:
1. कमजोर पाचन वाले लोग:
बथुआ में ऑक्सेलेट होता है, जो पचाना थोड़ा मुश्किल होता है। अगर आपका डाइजेशन पहले से ही कमज़ोर है, या आपको अक्सर गैस, एसिडिटी, पेट दर्द या कब्ज़ की शिकायत रहती है, तो बथुआ ज़्यादा मात्रा में न खाएं। ये आपकी आंतों में जलन बढ़ा सकता है, पेट फूलने (ब्लोटिंग) की समस्या कर सकता है और शौच को अनियमित बना सकता है। ऐसे लोगों को बथुआ बहुत ही कम मात्रा में, हल्का-फुल्का मसाला डालकर और अच्छी तरह पकाकर ही खाना चाहिए।
2. स्किन एलर्जी वाले लोग:
कुछ लोगों का इम्यून सिस्टम कुछ खास चीज़ों के प्रति बहुत तेज़ी से रिएक्शन करता है। बथुआ ऐसी ही एक पत्तेदार सब्ज़ी है, जो कुछ लोगों में एलर्जिक रिएक्शन पैदा कर सकती है। इसकी पत्तियों में मौजूद कुछ तत्व स्किन में हिस्टामिन रिलीज़ को बढ़ा सकते हैं, जिससे खुजली, लाल दाने, स्किन पर रैशेज़ और जलन हो सकती है। अगर आपकी स्किन पहले से ही बहुत सेंसिटिव है, तो बथुआ से परहेज करना ही बेहतर है।
3. शरीर में कैल्शियम की कमी वाले लोग:
बथुआ में पाए जाने वाले ऑक्सेलेट्स शरीर में कैल्शियम को पकड़ लेते हैं, जिससे कैल्शियम का सोखना मुश्किल हो जाता है। अगर आप पहले से ही कैल्शियम की कमी से जूझ रहे हैं, आपकी हड्डियां कमज़ोर हैं, आपको अक्सर थकान महसूस होती है या जोड़ों में दर्द रहता है, तो बथुआ का सेवन ज़्यादा न करें। इससे आपकी दिक्कतें और बढ़ सकती हैं।
4. किडनी स्टोन (पथरी) वाले मरीज़:
किडनी स्टोन, खासकर कैल्शियम ऑक्सेलेट स्टोन, तब बनते हैं जब शरीर में ऑक्सेलेट की मात्रा बढ़ जाती है। चूँकि बथुआ में ऑक्सेलेट काफी ज़्यादा मात्रा में होता है, ये पथरी बनने के खतरे को बढ़ा सकता है। ये किडनी पर फालतू बोझ डालता है और पेशाब करते समय दर्द या जलन पैदा कर सकता है। जिन लोगों को पहले से पथरी की शिकायत है, उन्हें डॉक्टर अक्सर ऑक्सेलेट वाली चीज़ों से बचने की सलाह देते हैं।
5. बढ़ा हुआ यूरिक एसिड:
अगर आपका यूरिक एसिड लेवल ज़्यादा रहता है, तो बथुआ आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है। ये जोड़ों के दर्द और सूजन को बढ़ा सकता है। इसलिए, जिन लोगों का यूरिक एसिड ज़्यादा है, उन्हें बथुआ से दूरी बनाए रखनी चाहिए।
तो अगली बार जब आप बथुआ खाने का मन बनाएं, तो एक बार ज़रूर सोचें कि क्या आप इनमें से किसी श्रेणी में आते हैं। सेहत पहले!
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