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Up kiran,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनाव में अब 'ड्रैगन' की एंट्री ने आग में घी डालने का काम किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा है कि चीन ने ईरान को युद्ध में मदद के लिए एक 'खास तोहफा' भेजा था, जिसे अमेरिकी नौसेना ने बीच समंदर में ही दबोच लिया है। ट्रंप के इस बयान के बाद वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच कूटनीतिक युद्ध छिड़ना तय माना जा रहा है।

'चीन से आया था गिफ्ट, हमने बीच रास्ते में दबोचा'

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू के दौरान बेहद आक्रामक लहजे में चीन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कल हमने एक जहाज पकड़ा है जिसमें कुछ ऐसी चीजें थीं जो बिल्कुल भी अच्छी नहीं थीं। शायद यह चीन की तरफ से ईरान के लिए कोई 'गिफ्ट' था। मुझे लगा था कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग और मेरे बीच कुछ सहमति बनी है, लेकिन लगता है जंग इसी तरह चलती है।" ट्रंप ने इसे अमेरिका के धैर्य की परीक्षा बताया है।

मिसाइल केमिकल या इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे? क्या था उस जहाज पर?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जिस ईरानी कंटेनर जहाज 'तूस्का' को जब्त किया है, उसे लेकर चौंकाने वाले दावे किए जा रहे हैं:

मिसाइल प्रोग्राम का सामान: रिपब्लिकन नेता निक्की हेली ने दावा किया है कि इस जहाज के जरिए चीन, ईरान को मिसाइल बनाने के लिए जरूरी केमिकल्स की सप्लाई कर रहा था।

संदेहास्पद पुर्जे: सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, जहाज से भारी मात्रा में धातु के पाइप, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और खास तरह के तार बरामद हुए हैं, जिनका इस्तेमाल उन्नत मिसाइलें बनाने में किया जा सकता है।

भड़का ड्रैगन: चीन ने आरोपों को बताया 'सफेद झूठ'

चीन ने ट्रंप के इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इन्हें पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि जिस जहाज को जब्त किया गया है, वह एक विदेशी कंटेनर शिप है और चीन का उससे कोई लेना-देना नहीं है। चीन ने स्पष्ट किया कि वह सैन्य सामानों के निर्यात को लेकर बेहद जिम्मेदार है और अमेरिका जानबूझकर उसे बदनाम करने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप की 'रेड लाइन' और 50% टैरिफ की धमकी

ट्रंप प्रशासन ने चीन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि ईरान की मदद करना अमेरिका की 'रेड लाइन' को पार करने जैसा है। ट्रंप पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि जो भी देश ईरान को हथियार या युद्ध सामग्री सप्लाई करेगा, उस पर 50 फीसदी तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जाएगा। अगर ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो चीन से आने वाले सामानों पर भारी टैक्स लग सकता है, जिससे दोनों महाशक्तियों के बीच 'ट्रेड वॉर' दोबारा शुरू हो सकता है।

ईरान-इजरायल युद्ध का नया मोड़

बता दें कि यह पूरा विवाद उस समय गरमाया है जब मिडिल ईस्ट में सात हफ्तों से जंग जारी है। एक तरफ ट्रंप ने पाकिस्तान के कहने पर 'सीजफायर' की अवधि बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ 'आर्थिक और नौसैनिक घेराबंदी' को और सख्त कर दिया है। चीन की इस कथित संलिप्तता ने इस क्षेत्रीय युद्ध को अब वैश्विक महाशक्तियों के टकराव में बदल दिया है।