Up kiran,Digital Desk : दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को एक याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए 7 फरवरी तक का समय दिया है। यह याचिका एक मजिस्ट्रेट के उस आदेश को चुनौती देती है, जिसमें 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में उनका नाम शामिल होने के आरोपों की जांच से इनकार कर दिया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी के वकील ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। इस पर अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 7 फरवरी तय कर दी। इससे पहले 9 दिसंबर को न्यायाधीश गोगाने ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
यह याचिका अधिवक्ता विकास त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है, जो राउज एवेन्यू कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैं। 11 सितंबर को मजिस्ट्रेट अदालत ने उनकी शिकायत को खारिज कर दिया था। अदालत का कहना था कि शिकायत कानूनी रूप से कमजोर है और उसमें ऐसे आरोप लगाए गए हैं जो अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि जनवरी 1980 में सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ा गया, जबकि उस समय वह भारतीय नागरिक नहीं थीं। याचिकाकर्ता की ओर से यह भी दावा किया गया कि इस प्रक्रिया में जालसाजी और एक सार्वजनिक प्राधिकारी को गुमराह करने जैसे तत्व शामिल थे।
हालांकि, मजिस्ट्रेट अदालत ने इन आरोपों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की ओर से ऐसे ठोस तथ्य पेश नहीं किए गए, जो धोखाधड़ी या जालसाजी जैसे अपराधों के कानूनी मानकों को पूरा कर सकें। केवल आरोप लगाना, बिना पर्याप्त विवरण और प्रमाण के, आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का आधार नहीं बन सकता।
मजिस्ट्रेट ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायत मुख्य रूप से मतदाता सूची के एक कथित अंश पर आधारित थी, जो स्वयं अप्रमाणित दस्तावेज की फोटोकॉपी की फोटोकॉपी थी। अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं केवल वहां अधिकार क्षेत्र बनाने की कोशिश करती हैं, जहां वास्तव में कोई अधिकार क्षेत्र बनता ही नहीं। अदालत के अनुसार, इस तरह से किसी नागरिक या सामान्य विवाद को आपराधिक रंग देना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

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