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Up kiran,Digital Desk : देवभूमि उत्तराखंड में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। जहां अप्रैल के महीने में लोग गर्मी की आहट महसूस करने लगते हैं, वहीं इस बार पहाड़ों पर हाड़ कंपा देने वाली ठंड ने वापसी की है। पिछले 24 घंटों से राज्य के मैदानी इलाकों में मूसलाधार बारिश और ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी (Snowfall) का सिलसिला जारी है। मंगलवार शाम से शुरू हुआ यह दौर बुधवार को भी बना रहा, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। बदरीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब जैसे पावन धाम चांदी जैसी सफेद बर्फ की चादर से ढक गए हैं।

60 किमी की रफ्तार से चली हवाएं, 'जनवरी' जैसा हुआ अहसास

मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के सभी 13 जिलों में मौसम ने करवट ली है। मैदानी इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चली बर्फीली हवाओं और बारिश ने लोगों को दोबारा स्वेटर और जैकेट निकालने पर मजबूर कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि अप्रैल की धूप की जगह लोग घरों में दुबकने या अलाव का सहारा लेने को मजबूर हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी ने पूरे राज्य के पारे को धड़ाम से गिरा दिया है।

तापमान में 6 डिग्री तक की भारी गिरावट, पहाड़ों पर बर्फ का पहरा

पंतनगर मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की कमी आई है। रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों के 3000 मीटर से ऊंचे क्षेत्रों में जबरदस्त हिमपात हुआ है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 3-4 दिनों में धूप खिलने के साथ तापमान में दोबारा 5 से 7 डिग्री की बढ़ोत्तरी हो सकती है, लेकिन फिलहाल ठंड का सितम बरकरार है।

कल कैसा रहेगा मौसम? इन 5 जिलों के लिए येलो अलर्ट

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के मुताबिक, गुरुवार को भी राहत के आसार कम ही हैं। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश और 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर बर्फबारी की संभावना जताई गई है। मैदानी जिलों में मौसम शुष्क रह सकता है, लेकिन पहाड़ों से आने वाली हवाएं ठंडक बनाए रखेंगी। शुक्रवार को भी 3700 मीटर से ऊंचे क्षेत्रों में हिमपात की चेतावनी जारी की गई है।

तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए सावधानी जरूरी

चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच अचानक हुई इस बर्फबारी ने प्रशासन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में बर्फ जमने से रास्ते और पुनर्निर्माण कार्यों पर असर पड़ा है। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाने से पहले मौसम का अपडेट जरूर लें और साथ में पर्याप्त गर्म कपड़े रखें।