Up kiran,Digital Desk : दिल्ली हाईकोर्ट ने मेट्रो लाइन से कॉपर केबल चोरी के एक गंभीर मामले में आरोपी गिग वर्कर को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आरोपी के कृत्य से न केवल सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान हुआ, बल्कि आम यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ी।
“यह साधारण चोरी नहीं, जनता की जान से खिलवाड़”
न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी की हरकत को केवल लापरवाही नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, मेट्रो जैसे संवेदनशील सार्वजनिक परिवहन तंत्र से जुड़ी केबल की चोरी सीधे तौर पर लोगों के जीवन और अंगों को गंभीर जोखिम में डालती है।
आदतन अपराधी होने पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने 31 जनवरी के आदेश में कहा कि जमानत पर विचार करते समय सार्वजनिक हित और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन जरूरी होता है। इस मामले में आरोपी आदतन अपराधी पाया गया है और उसका अपराध समाज पर व्यापक प्रभाव डालने वाला है। ऐसे में उसे राहत देना उचित नहीं होगा।
सरकारी खजाने को हुआ भारी नुकसान
कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी की हरकत से न केवल मेट्रो संचालन प्रभावित हुआ, बल्कि सरकारी खजाने को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। अदालत ने कहा कि इन तथ्यों और कानूनी पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कैसे पकड़ा गया आरोपी
दिल्ली पुलिस के अनुसार, आरोपी एक फूड डिलीवरी ऐप से जुड़ा गिग वर्कर था। 29 और 30 जून 2025 की दरम्यानी रात करीब 2:51 बजे ट्रैक्शन पावर कंट्रोल की ओर से केबल चोरी की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस ने पंजाबी बाग इलाके से आरोपी को 32 मीटर कॉपर केबल के साथ गिरफ्तार किया। वह जुलाई 2025 से न्यायिक हिरासत में है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत चोरी का केस दर्ज किया है। इसके साथ ही मेट्रो रेलवे संचालन और अनुरक्षण अधिनियम, 2002 के तहत ट्रेन संचालन में बाधा डालने, मेट्रो संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और तोड़फोड़ से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं।




