img

Up kiran,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्थाओं को हिलाकर रख दिया है। जहाँ एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बाधित हुई है, वहीं भारत के पड़ोसी देश इस वक्त भीषण ऊर्जा संकट और बेतहाशा महंगाई से जूझ रहे हैं। 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की नाकेबंदी के डर से पाकिस्तान से लेकर श्रीलंका तक त्राहि-माम मचा हुआ है। इस बीच, भारत अपनी मजबूत रिफाइनिंग क्षमता के दम पर पड़ोसियों के लिए एकमात्र उम्मीद की किरण बनकर उभरा है।

पाकिस्तान: रिकॉर्ड तोड़ महंगाई और ₹520 का डीजल

पड़ोसी देश पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में 43% से 55% तक की भारी वृद्धि की है। डीजल की कीमत अब ₹520.35 प्रति लीटर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई है, जबकि पेट्रोल ₹458.41 प्रति लीटर बिक रहा है। हालांकि, देशव्यापी प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कीमतों में ₹80 की कटौती का संकेत दिया है, लेकिन आर्थिक स्थिति अब भी 'आईसीयू' में बनी हुई है।

बांग्लादेश और नेपाल: बिजली बचाने के लिए दफ्तरों में ताले और एसी पर पाबंदी

बांग्लादेश: अपनी 95% तेल-गैस जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर बांग्लादेश ने सरकारी दफ्तरों में एसी का तापमान 25°C से कम न रखने और फालतू लाइटें बंद करने का सख्त आदेश दिया है। देश ऊर्जा संकट से निपटने के लिए वैश्विक संस्थाओं से $2 अरब के कर्ज की गुहार लगा रहा है।

नेपाल: ईंधन की खपत कम करने के लिए नेपाल सरकार ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए सप्ताह में दो दिन (शनिवार और रविवार) की छुट्टी की घोषणा की है। सरकार को उम्मीद है कि दफ्तर और स्कूल बंद रहने से पेट्रोल-डीजल की बचत होगी।

श्रीलंका और मालदीव: भारत से मांगी मदद

श्रीलंका में बिजली की दरों में करीब 40% की बढ़ोतरी की गई है और वहां चार दिन का कार्य सप्ताह लागू कर दिया गया है। दूसरी तरफ, मालदीव सरकार ने भी तेल संकट से बचने के लिए भारत से पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई का अनुरोध किया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत फिलहाल कॉमर्शियल एग्रीमेंट के तहत बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और श्रीलंका को ईंधन की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित कर रहा है।

भारत की स्थिति: सुरक्षित और आत्मनिर्भर

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर होने के नाते भारत ने स्पष्ट किया है कि घरेलू स्तर पर ईंधन की कोई कमी नहीं है। भारत न केवल अपनी जरूरतों को पूरा कर रहा है, बल्कि संकट की इस घड़ी में अपने पड़ोसियों के लिए 'सप्लाई हब' की भूमिका निभा रहा है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और रूस जैसे देशों से सीधे कच्चे तेल की खरीद ने भारत को फिलहाल इस वैश्विक संकट की तपिश से बचा रखा है।