Up kiran,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने चिर-परिचित 'बेबाक' और बेखौफ अंदाज के कारण वैश्विक सुर्खियों में हैं। फ्लोरिडा के मियामी बीच स्थित फाएना होटल में आयोजित 'फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव' (FII) समिट के दौरान ट्रंप ने राजनयिक प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए खुद को 'अनफिल्टर्ड' नेता घोषित कर दिया। उन्होंने खुले मंच से चुनौती दी कि उनसे किसी भी विषय पर, यहाँ तक कि उनके निजी जीवन से जुड़े सवाल भी पूछे जा सकते हैं, क्योंकि वे कुछ भी नहीं छिपाते।
"राजनेता सवालों से डरते हैं, मैं नहीं": ट्रंप का बड़ा दावा
आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में राष्ट्र प्रमुखों के भाषण और सवाल-जवाब पहले से तय या 'स्क्रिप्टेड' होते हैं, लेकिन ट्रंप ने इस परंपरा को तोड़ दिया। मंच पर आते ही उन्होंने कहा, "बाकी राजनेता सवालों की छंटनी करते हैं, वे डरते हैं कि जनता या मीडिया उनसे क्या पूछ लेगी। लेकिन मैं यहाँ आपके सामने खड़ा हूँ। आप मुझसे वह सब कुछ पूछ सकते हैं जो आपके मन में है। चाहे वह वैश्विक अर्थव्यवस्था हो या कोई निजी विषय, मैं पूरी तरह अनफिल्टर्ड और खुली किताब हूँ।"
ईरान पर सैन्य विजय का दावा: गियर बदलते ही दिखाया कड़ा रुख
अपनी बेबाकी के बीच ट्रंप ने अचानक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध के मोर्चे पर गियर बदला। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने ईरान की कमर तोड़ दी है और उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर कर दिया है। हालांकि, दूसरी ओर ईरानी सेना लगातार अपने मिसाइल जखीरे का प्रदर्शन कर रही है, लेकिन ट्रंप ने मियामी के मंच से स्पष्ट कर दिया कि उनके नेतृत्व में अमेरिका फिर से दुनिया का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बन गया है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग: 'असली इंसान' या 'पद की गरिमा'?
ट्रंप के इस 'अनफिल्टर्ड' बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। एरिक डॉर्टी और मारियो नॉफल जैसे प्रभावशाली हस्तियों द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद इंटरनेट दो धड़ों में बंट गया है:
समर्थकों का पक्ष: उनका मानना है कि ट्रंप एक 'असली इंसान' और पारदर्शी नेता हैं जो बनावटी राजनीति नहीं करते।
आलोचकों का पक्ष: विरोधियों का कहना है कि एक राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसी अनौपचारिक भाषा शोभा नहीं देती और यह पद की गरिमा के खिलाफ है।
रणनीति या स्वभाव? जानकारों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह अंदाज उनकी एक सोची-समझी चुनावी और वैश्विक रणनीति का हिस्सा है। वे खुद को एक ऐसे 'एंटी-एस्टेब्लिशमेंट' नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं जो जनता से सीधे जुड़ा है और किसी भी स्क्रिप्ट या प्रोटोकॉल में बंधने को तैयार नहीं है। मियामी समिट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप को न तो कोई स्क्रिप्ट रोक सकती है और न ही कोई सेंसरशिप।




