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Up kiran,Digital Desk : पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण ऊर्जा और आर्थिक संकट के दोहरे जाल में फंस गया है। मध्य पूर्व (Middle East) में जारी युद्ध और कतर से होने वाली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति रुकने से पूरे देश में हाहाकार मचा है। हालात इतने बेकाबू हैं कि शहरों में 8 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 14-14 घंटे की लोडशेडिंग की जा रही है।

संकट की जड़: क्यों बुझ गई पाकिस्तान की बत्ती?

पाकिस्तान की बिजली व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा आयातित गैस (LNG) पर निर्भर है। वर्तमान संकट के पीछे दो मुख्य अंतरराष्ट्रीय कारण हैं:

कतर प्लांट पर हमला: मार्च की शुरुआत में दुनिया के सबसे बड़े LNG प्लांट (कतर) पर हुए हमलों के कारण उत्पादन ठप हो गया है। कतर ने पाकिस्तान को होने वाली सप्लाई फिलहाल रोक दी है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी: अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री मार्ग बंद है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवन रेखा है, जिसके बंद होने से पाकिस्तान तक ईंधन के जहाज नहीं पहुंच पा रहे हैं।

आंकड़ों में संकट की भयावहता

बिजली की कमी: शाम के समय (Peak Hours) बिजली की कमी 4,500 मेगावाट तक पहुंच गई है, जो कुल मांग का लगभग 25% है।

उद्योगों पर मार: 'फेडरेशन ऑफ पाकिस्तान चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' (FPCCI) के अनुसार, फैक्ट्रियों में 8 घंटे की कटौती हो रही है, जिससे निर्यात (Export) और मैन्युफैक्चरिंग पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।

महंगी गैस का बोझ: कतर से गैस न मिलने पर पाकिस्तान 'स्पॉट मार्केट' से महंगी गैस खरीदने की कोशिश कर रहा है, लेकिन खाली खजाने के कारण यह लगभग असंभव लग रहा है।

शांति वार्ता की मेजबानी और आर्थिक चुनौतियां

अजीब विडंबना यह है कि जहाँ पाकिस्तान की अपनी आवाम अंधेरे में डूबी है, वहीं वह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की मेजबानी कर रहा है। वाशिंगटन ने संकेत दिए हैं कि बातचीत का अगला दौर इस्लामाबाद में ही होगा।

सऊदी अरब से मिली 'संजीवनी':

बढ़ते विदेशी कर्ज के बीच पाकिस्तान को सऊदी अरब से 3 अरब डॉलर की वित्तीय मदद मिली है। हालांकि, यह राशि सीधे विकास कार्य में नहीं लगेगी, बल्कि इसका उपयोग संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पुराने कर्ज की किस्त चुकाने के लिए किया जाएगा।