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Up kiran,Digital Desk : केंद्र सरकार देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी में है। संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण, जो पहले 2034 से प्रस्तावित था, अब उसे 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू करने की योजना है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार वर्तमान बजट सत्र में ही इसके लिए एक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस दिशा में विपक्ष के साथ सहमति बनाने के लिए बातचीत का दौर भी शुरू हो चुका है।

सीटों के परिसीमन और जनगणना का नया गणित

महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के लिए सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में बदलाव की तैयारी कर रही है। योजना के अनुसार, 2027 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना से पहले ही लोकसभा सीटों का परिसीमन (Delimitation) शुरू किया जा सकता है। यदि यह संशोधन बिल पारित होता है, तो लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या बढ़कर 814 हो जाएगी। इसमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह गणना 2011 की जनसंख्या के आधार पर सीटों को बढ़ाकर की जा सकती है, ताकि 2029 के आम चुनाव में इसे जमीन पर उतारा जा सके।

विपक्ष को साधने की कवायद: शाह और रिजीजू ने संभाली कमान

इस महत्वपूर्ण विधेयक पर राजनीतिक आम सहमति बनाने के लिए गृहमंत्री अमित शाह और संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजीजू ने मोर्चा संभाल लिया है। रिजीजू ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर चर्चा की पहल की है। हालांकि, विपक्षी खेमे में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे दल पहले से ही इसे जल्द लागू करने की मांग करते रहे हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी (SP) और आरजेडी (RJD) जैसे दल आरक्षण के भीतर ओबीसी और एससी-एसटी वर्ग के लिए अलग कोटे की मांग दोहरा सकते हैं।

छोटे राज्यों के लिए क्या है खास प्रावधान?

प्रस्तावित बिल में बड़े राज्यों में तो 33 फीसदी के हिसाब से सीटें बढ़ाई जाएंगी, लेकिन जिन छोटे राज्यों में केवल एक या दो सीटें हैं, वहां सीटों की संख्या नहीं बढ़ेगी। ऐसे राज्यों में 'रोटेशन' प्रणाली अपनाई जाएगी, जिसमें हर दो या तीन चुनाव के बाद सीटें बारी-बारी से महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। सरकार इस बिल को पहले राज्यसभा में पेश कर सकती है, ताकि उच्च सदन से हरी झंडी मिलने के बाद इसे निचले सदन में लाया जा सके।