Up Kiran,Digital Desk: आजकल दिल की बीमारियां एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं, जो न केवल वृद्धों को बल्कि युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही हैं। खराब जीवनशैली, जंक फूड की आदतें और शारीरिक गतिविधि की कमी मुख्य कारण माने जा रहे हैं। मोटापा, उच्च रक्तचाप और डायबिटीज जैसी बीमारियां सीधे दिल की सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं। हालांकि, अब एक नई रिसर्च ने यह साबित किया है कि यदि हम अपनी डाइट में छोटे बदलाव लाएं तो दिल की सेहत में बड़ा फर्क ला सकते हैं। खासकर, अगर ओटमील को अपने डाइट में शामिल किया जाए तो इससे कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
ओटमील डाइट: छोटा बदलाव, बड़ा असर
जर्मनी के यूनिवर्सिटी ऑफ बॉन के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसमें 32 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। ये सभी लोग मेटाबॉलिक सिंड्रोम के शिकार थे, जो दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। रिसर्च में पाया गया कि यदि लोग केवल दो दिन तक ओटमील का सेवन करते हैं तो उनका खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) लगभग 10% तक कम हो सकता है। इसके अलावा, इस डाइट का असर 6 हफ्तों तक भी बना रहता है, जबकि प्रतिभागियों ने सामान्य डाइट पर वापसी की थी।
मेटाबॉलिक सिंड्रोम और उसका खतरा
मेटाबॉलिक सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर के कई अंगों में समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसमें शामिल हैं:
अधिक वजन और मोटापा
उच्च रक्तचाप
उच्च रक्त शर्करा (ब्लड शुगर)
खराब कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना
इन समस्याओं के कारण दिल की बीमारियां, डायबिटीज और स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
ओटमील डाइट की कार्यप्रणाली: कैसे असरदार है यह डाइट?
रिसर्च के दौरान दो अलग-अलग समूहों में अध्ययन किया गया:
ओटमील डाइट समूह: इस समूह को दो दिन तक सिर्फ ओटमील खाने को दिया गया। रोजाना 300 ग्राम ओटमील खाने की अनुमति दी गई, जिसमें फल और सब्जियां मिलाने की छूट थी।
दूसरा समूह: इस समूह को ओट्स तो नहीं दिए गए, लेकिन उनकी कैलोरी भी घटाई गई।
रिसर्च में पाया गया कि ओटमील डाइट वाला समूह ज्यादा फायदा उठा रहा था। 48 घंटे के भीतर इस समूह में कोलेस्ट्रॉल (LDL) में 10% की कमी आई और औसतन 2 किलो वजन भी घटा। इसके अलावा, ब्लड प्रेशर में भी हल्की गिरावट देखी गई।
ओटमील से दिल की सेहत में सुधार
ओटमील के सेवन से शरीर के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, इंसुलिन रेजिस्टेंस को घटाने और डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि ओटमील को दिल और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।
कितना असरदार है यह डाइट?
रिसर्च में यह पाया गया कि ओटमील को नियमित रूप से छोटे हिस्सों में खाने से उतना असर नहीं होता जितना कि कम समय में ज्यादा मात्रा में इसे खाने से। शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि लोग हर छह सप्ताह में दो दिन की ओटमील डाइट अपनाते हैं तो यह कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने, डायबिटीज के खतरे को कम करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।
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