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Up Kiran,Digital Desk: भारत के केंद्रीय बजट ने पिछले एक दशक में अभूतपूर्व बदलाव देखे हैं, खासकर मोदी सरकार के नेतृत्व में। बजट के आकार में हुई बढ़ोतरी ने एक नई आर्थिक दिशा को जन्म दिया है, जो ना केवल सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, बल्कि आम जनता, विकास योजनाओं और देश की समग्र आर्थिक दृष्टि पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है।

बजट का बढ़ता आकार: मोदी सरकार के कार्यकाल में ऐतिहासिक उछाल

साल 2014-15 में 17.95 लाख करोड़ रुपये से शुरू होकर, भारत का केंद्रीय बजट अब 50.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा मोदी सरकार के कार्यकाल में लगभग तीन गुना बढ़ा है। खास बात यह है कि यह वृद्धि केवल सरकार के खर्चे का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि यह देश की प्राथमिकताएं, योजनाएं और जनता की उम्मीदों को भी दर्शाती है।

कोरोना संकट: चुनौती और सुधार

कोविड-19 महामारी ने आर्थिक संकट को और भी गहरा किया। महामारी के दौरान जब राजकोषीय घाटा 9 प्रतिशत तक पहुंच गया, तब कई सवाल उठे थे। मगर सरकार ने इसे संभालते हुए कई सुधारात्मक कदम उठाए। इसके परिणामस्वरूप, वित्तीय वर्ष 2025-26 तक घाटे को घटाकर 4.4 प्रतिशत तक लाने में सफलता प्राप्त की है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि आगामी बजटों में सरकार विकास की गति को बनाए रखते हुए वित्तीय स्थिरता बनाए रखेगी।

बजट वृद्धि: हर साल का असर

2014 से लेकर 2025 तक, बजट के आकार में निरंतर वृद्धि हुई है, और हर साल यह वृद्धि एक नई दिशा में देश की आर्थिक योजनाओं को आकार देती है।

2014-15: 17.95 लाख करोड़ रुपये से बजट का आगाज हुआ।

2015-16: बजट में मामूली कमी आई और यह 17.77 लाख करोड़ रुपये रहा।

2016-17: केंद्र सरकार ने बजट को बढ़ाकर 19.78 लाख करोड़ रुपये किया।

2017-18: बजट 21.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा, एक अहम मोड़ था।

2018-19: सरकार ने विकास योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए बजट को 24.42 लाख करोड़ रुपये किया।

2019-20: यह बढ़कर 27.86 लाख करोड़ रुपये हो गया।

2020-21: कोविड संकट ने बजट को 30.42 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया।

2021-22: महामारी के प्रभाव से उबरते हुए बजट 34.83 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा।

2022-23: यह आंकड़ा 39.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा।

2023-24: सरकार ने बजट को 45.03 लाख करोड़ रुपये कर दिया।

2024-25: जुलाई में पेश किए गए बजट में यह 48.21 लाख करोड़ रुपये हुआ।

2025-26: अब बजट 50.65 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच चुका है।