Up Kiran, Digital Desk: संगम की रेत पर बसे तंबुओं के बीच इस बार केवल धार्मिक आयोजन नहीं हुए, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक मजबूत तस्वीर भी उभरकर सामने आई। शुक्रवार को किन्नर अखाड़े के शिविर में हुए एक विशेष अनुष्ठान ने सनातन परंपरा में समावेशिता को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी। इस दौरान देश की पहली किन्नर वकील को महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसे एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
कानून से अध्यात्म तक का सफर
लंबे समय तक न्याय व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने के बाद अब देश की पहली किन्नर अधिवक्ता ने आध्यात्मिक मार्ग को अपनाया है। उनका यह परिवर्तन केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है कि अब धार्मिक संस्थाएं भी समाज के विविध वर्गों को नेतृत्व का अवसर देने लगी हैं। संत पद पर उनकी नियुक्ति ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया।
11 संतों को सौंपी गई नई जिम्मेदारी
इस धार्मिक आयोजन में कुल 11 संतों का पट्टाभिषेक किया गया। इनमें दो महिलाएं, एक पुरुष और किन्नर समाज के प्रतिनिधि शामिल रहे। एक संत को महंत की भूमिका दी गई। पूरा कार्यक्रम किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
परंपराओं के साथ निभाया गया अनुशासन
दीक्षा प्रक्रिया में प्राचीन सनातन परंपराओं का पूरी तरह पालन किया गया। संतों ने संगम तट पर आत्म पिंडदान किया जो सांसारिक जीवन से विरक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद पांच गुरुओं से दीक्षा ली गई। रस्मों में चोटी का त्याग, भस्म धारण और वैराग्य वस्त्र प्रदान करना शामिल रहा। अंत में गुरुमंत्र देकर उन्हें सन्यास की मर्यादा में प्रवेश कराया गया।




