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Up Kiran,Digital Desk: 2026-27 के केंद्रीय बजट को लेकर ज्वेलरी सेक्टर में खासी उम्मीदें जताई जा रही हैं। सोने के बढ़ते दाम और मांग में कमी के बीच, इस बार की वित्तीय नीति से सोने की खरीदारी और निवेश को लेकर कुछ राहत की उम्मीद जताई जा रही है। यदि सरकार इस क्षेत्र के लिए कुछ अहम फैसले लेती है तो इससे आम आदमी के बजट पर सीधा असर पड़ेगा और सोने के गहनों की कीमतों में राहत मिल सकती है।

इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती: कीमतों में गिरावट की संभावना

भारतीय ज्वेलरी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा मुद्दा इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर है। चूंकि भारत अपनी अधिकांश सोने की आवश्यकता विदेशों से पूरी करता है, ऐसे में इंपोर्ट ड्यूटी की ऊंची दरों के कारण गहनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इंपोर्ट ड्यूटी में कमी करती है, तो न केवल स्थानीय बाजार में सोने के गहनों की कीमतों में गिरावट आएगी, बल्कि भारत में बने गहने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकेंगे। इससे न सिर्फ उद्योग को बल्कि आम जनता को भी फायदा होगा।

GST में कटौती: खरीदारी में आसानियां

ज्वेलरी पर लागू वर्तमान 3% GST ग्राहकों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस टैक्स को घटाकर 1% या 1.25% तक लाती है, तो इसका सीधा फायदा ग्राहकों को होगा। खासतौर पर मध्यम वर्ग, जो सोने की बढ़ती कीमतों से परेशान होकर खरीदारी टाल रहा है, वह फिर से गहनों के शोरूम का रुख कर सकेगा। यह टैक्स में कमी ग्राहकों के लिए बड़ी बचत साबित हो सकती है और ज्वेलरी की मांग को भी बढ़ावा मिल सकता है।

EMI पर सोने की खरीदारी: नया ट्रेंड?

इस बार के बजट में एक नई उम्मीद यह भी है कि ज्वेलरी के लिए ईएमआई (किश्तों) की सुविधा को बढ़ावा दिया जाए। खासकर छोटे मूल्य की ज्वेलरी के लिए इस सुविधा को लागू करने से आम आदमी को एकमुश्त भारी रकम चुकाने की चिंता नहीं होगी। ग्राहक आसानी से अपने पसंदीदा गहने किश्तों में खरीद सकेंगे, जिससे गहनों की खरीदारी अधिक सुलभ और पारदर्शी बन सकती है। यह कदम मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों को अपनी शादी और अन्य अवसरों पर गहनों की खरीदारी के लिए प्रेरित कर सकता है।

पुराने सोने का पुनर्नवीनीकरण: देश की सोने की दौलत को नई दिशा

भारत में 24,000 टन से अधिक सोना घरेलू बाजार में जमा हुआ है, जो किसी समय में प्रयोग में लाया गया था। उद्योग इस पुराने सोने को फिर से सर्कुलेट करने के लिए नीति में बदलाव की उम्मीद कर रहा है। बजट में इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाने की संभावना जताई जा रही है, ताकि लोग पुराने सोने को पुनर्नवीनीकरण के रूप में लाकर इसे फिर से प्रयोग में ला सकें। इससे ना केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि देश के आंतरिक सोने के भंडार में भी बढ़ोतरी होगी, जो आर्थिक स्थिरता में योगदान करेगा।

कस्टम और व्यापार प्रक्रियाओं में सुधार

ज्वेलरी क्षेत्र के कारोबारियों ने सरकार से कस्टम और व्यापार प्रक्रियाओं को डिजिटल और आसान बनाने की मांग की है। लंबी कस्टम जांच और जटिल कागजी कार्यवाही के कारण निर्यात में देरी हो रही है। इससे पारदर्शिता में कमी और व्यापार में बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। कारोबारियों का मानना है कि अगर सरकार 'फास्ट क्लीयरेंस' प्रणाली को लागू करती है, तो 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का सपना सच हो सकेगा, और भारतीय ज्वेलरी का निर्यात अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ सकता है।