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Up kiran,Digital Desk : तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। कैग (CAG) की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान राज्य सरकार ने अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए आरबीआई से भारी-भरकम उधारी ली है। आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना ने साल के 365 दिनों में से 363 दिन विशेष आहरण सुविधा (SDF) का लाभ उठाया, जिसके तहत 27,730 करोड़ रुपये की राशि निकाली गई। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य के पास अपने नियमित खर्चों के लिए भी पर्याप्त नकदी उपलब्ध नहीं है।

SDF और WMA: क्या हैं ये उधारी तंत्र?

आरबीआई राज्य सरकारों को उनके दैनिक खर्चों और नकदी के उतार-चढ़ाव को संभालने के लिए कुछ अल्पकालिक ऋण सुविधाएं देता है।

SDF (Special Drawing Facility): यह सरकारी प्रतिभूतियों के बदले लिया जाने वाला ऋण है।

WMA (Ways and Means Advances): जब राज्य का खर्च उसकी प्राप्तियों से अधिक हो जाता है, तो वह इस सुविधा का उपयोग करता है। कैग के अनुसार, तेलंगाना ने 298 दिनों तक 64,188 करोड़ रुपये के डब्ल्यूएमए का भी उपयोग किया।

Overdraft: जब एसडीएफ और डब्ल्यूएमए की सीमा भी समाप्त हो जाती है, तब राज्य को ओवरड्राफ्ट लेना पड़ता है। तेलंगाना ने पिछले वर्ष 123 दिनों तक कुल 37,457 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट लिया।

न्यूनतम नकद शेष बनाए रखने में भी नाकाम

कैग की रिपोर्ट में एक और चिंताजनक बात सामने आई है। आरबीआई के नियमों के अनुसार, हर राज्य को अपने खाते में कम से कम 1.38 करोड़ रुपये का न्यूनतम नकद शेष (Minimum Cash Balance) बनाए रखना अनिवार्य है। रिपोर्ट कहती है कि तेलंगाना सरकार इस मामूली राशि को बनाए रखने में भी विफल रही, जिसके कारण उसे बार-बार आरबीआई के कर्ज का सहारा लेना पड़ा। वित्तीय वर्ष के अंत तक राज्य पर 5,842 करोड़ रुपये का डब्ल्यूएमए बकाया था।

विपक्ष हमलावर: 'कंगाल होने की कगार पर राज्य'

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद 'तेलंगाना जागृति' की अध्यक्ष और बीआरएस नेता के. कविता ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा कि हर महीने 12,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त करने के बावजूद सरकार दैनिक खर्च चलाने के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व में राज्य की वित्तीय स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि वह पूरी तरह आरबीआई की सहायता पर निर्भर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेलंगाना ने अपनी खर्च करने की नीतियों और ऋण प्रबंधन पर जल्द ही नियंत्रण नहीं पाया, तो आने वाले समय में राज्य पर कर्ज का बोझ असहनीय हो सकता है। फिलहाल, कैग की यह रिपोर्ट राज्य की चरमराती अर्थव्यवस्था की ओर एक बड़ा इशारा है।