Up kiran,Digital Desk : बिहार की राजनीति में इन दिनों वार-पलटवार का दौर चरम पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के फ्लोर टेस्ट (बहुमत परीक्षण) से ठीक पहले जेडीयू और आरजेडी के बीच जबरदस्त 'माइंड गेम' देखने को मिला। जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को सरेआम ललकारते हुए कहा कि अगर उनमें दम है, तो वे सदन में मत विभाजन (वोटिंग) की मांग करें। हालांकि, सदन की कार्यवाही के दौरान तेजस्वी या विपक्ष के किसी नेता ने वोटिंग की मांग नहीं की और सम्राट चौधरी ने ध्वनि मत से अपना विश्वास मत हासिल कर लिया।
जेडीयू के इस उकसावे के पीछे बिहार की सत्ता और विपक्षी खेमे के भीतर चल रही गहरी उठापटक छिपी है। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों जेडीयू तेजस्वी को वोटिंग के लिए उकसा रही थी और तेजस्वी ने इससे किनारा क्यों किया।
नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी पर मंडराता खतरा
जेडीयू के उकसावे के पीछे सबसे बड़ी वजह 'नेता प्रतिपक्ष' का पद है। नियमों के मुताबिक, इस पद के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10% विधायक होना अनिवार्य है। बिहार विधानसभा में राजद के पास वर्तमान में 25 विधायक हैं।
खतरे का गणित: यदि सदन में मत विभाजन (वोटिंग) होता और राजद के 2 या 3 विधायक क्रॉस वोटिंग कर देते या अनुपस्थित रहते, तो राजद की संख्या 23 या उससे नीचे गिर सकती थी।
सुविधाओं का मोह: नेता प्रतिपक्ष के नाते तेजस्वी यादव को कैबिनेट मंत्री का दर्जा, विशेष सुरक्षा और सरकारी सुविधाएं मिली हुई हैं। संख्या बल कम होते ही यह दर्जा छिन सकता है।
राजद के अंदर 'अंतर्कलह' को उजागर करने की रणनीति
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार का दावा है कि तेजस्वी यादव 'पदलोलुप' हैं और वे जानते हैं कि उनके अपने विधायक एकजुट नहीं हैं। हाल ही में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के 3 और राजद के 1 विधायक ने पाला बदल लिया था, जिससे राजद उम्मीदवार एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा। जेडीयू चाहती थी कि वोटिंग के जरिए यह साफ हो जाए कि राजद के कितने विधायक पाला बदलने को तैयार बैठे हैं।
नीतीश कुमार का 'पद त्याग' बनाम तेजस्वी की 'अकड़'
नीरज कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि प्रचंड बहुमत होने के बावजूद नीतीश कुमार ने पद त्याग की मिसाल पेश की और सम्राट चौधरी को नेतृत्व सौंपा। उनके पुत्र निशांत कुमार ने भी किसी पद की लालसा नहीं दिखाई। उन्होंने तेजस्वी पर कटाक्ष करते हुए कहा, "अकड़ अब भी कायम है, लेकिन हकीकत यह है कि इन्हें करंट लग रहा है।"
अगली अग्निपरीक्षा: विधान परिषद चुनाव
फ्लोर टेस्ट में तो तेजस्वी ने वोटिंग से बचकर अपनी इज्जत बचा ली, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। अगले महीने विधान परिषद की 9 सीटों के लिए चुनाव होने वाले हैं। जेडीयू और एनडीए खेमे की नजर राजद के उन असंतुष्ट विधायकों पर है जो क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
सदन का अंकगणित (वर्तमान स्थिति)
एनडीए (भाजपा+जेडीयू+हम): 201 विधायक
विपक्ष (राजद+कांग्रेस+वामदल): 41 विधायक
खाली सीट: 1 (नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद बांकीपुर सीट खाली)
सम्राट चौधरी का वादा: विश्वास मत जीतने के बाद सम्राट चौधरी ने बड़ा ऐलान किया कि वे ऐसी व्यवस्था करेंगे जहां मंत्रियों और अफसरों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे। वहीं तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि “25 से 30 बोलकर नीतीश जी खुद फिनिश हो गए।”




