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Up kiran,Digital Desk : बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में न केवल बहुमत साबित किया, बल्कि अपने नाम, उम्र और एफिडेविट (शपथ पत्र) को लेकर विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर भी करारा जवाब दिया। सदन में विश्वास मत पर चर्चा के दौरान सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक सफर और कानूनी लड़ाइयों का जिक्र करते हुए तेजस्वी यादव और राजद खेमे को जमकर सुनाया।

उम्र और जेल जाने के विवाद पर दो टूक

सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सम्राट चौधरी की उम्र को लेकर चल रही चर्चाओं पर उन्होंने कहा, "विपक्ष मेरी उम्र पर सवाल उठाता है, लेकिन उन्हें इतिहास देखना चाहिए। अगर मैं नाबालिग होता, तो क्या 1985 और 1995 में मुझे जेल भेजा जाता या बाल सुधार गृह? मैं जेल में रहा और ये सभी मामले निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गए। मैंने हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की।"

एफिडेविट और योग्यता पर दी सफाई

विपक्ष द्वारा एफिडेविट के उच्चारण (हाफिडेविट) और दस्तावेजों पर तंज कसने का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी योग्यता और दस्तावेज पूरी तरह पारदर्शी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, "जब तक यूजीसी या यूनिवर्सिटी से दस्तावेज प्रमाणित नहीं हुए, तब तक मैंने शपथ पत्र में उन्हें नहीं लगाया। मैं 1999 में पहली बार मंत्री बना था और आज छठी बार मंत्री से मुख्यमंत्री तक के पद पर पहुँचा हूँ। मेरा 27 साल का राजनीतिक करियर है, इतने समय में तो लोग राजनीति छोड़ देते हैं।"

"लालू यादव के अत्याचारों ने मुझे नेता बनाया"

सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक उदय का श्रेय लालू यादव के 'कुशासन' को दिया। उन्होंने भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा, "मैं राजनीति में शौक से नहीं आया, बल्कि लालू यादव के शासनकाल में हुए अत्याचारों के कारण आया। उन्होंने मेरे परिवार के 22 लोगों को जबरदस्ती जेल में डाला। लालू यादव ने खुद मिलर स्कूल के मैदान में मुझसे माफी मांगी थी कि उनसे गलती हुई है। सत्ता किसी की बपौती नहीं है, मैं 14 करोड़ बिहारियों के आशीर्वाद से यहाँ बैठा हूँ।"

व्यक्तिगत हमलों पर तेजस्वी को चेतावनी

तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोलते हुए सम्राट ने कहा कि व्यक्तिगत हमला करने वालों को व्यक्तिगत जवाब सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "जो व्यक्ति अपने परिवार में अपनी बहन का सम्मान नहीं कर सकता, वह हमें सम्मान करना न सिखाए। मैंने लालू यादव के साथ भी काम किया है और मैं जानता हूँ कि उन्होंने सबसे पहले संघ के सामने घुटने टेके थे।"

सम्राट चौधरी के भाषण की मुख्य बातें:

27 साल का अनुभव: 1999 से अब तक 6 बार मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।

पारदर्शिता: शिक्षा और उम्र से जुड़े सभी दस्तावेज कानूनी रूप से वैध।

शिक्षा सुधार का वादा: उन्होंने दोहराया कि वे ऐसी व्यवस्था लाएंगे जहाँ अधिकारियों और मंत्रियों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें।

आरजेडी को चुनौती: सत्ता सेवा का माध्यम है, किसी परिवार की जागीर नहीं।