Up Kiran, Digital Desk: लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार बेंगलुरु में सामाजिक और शैक्षिक सर्वे (Social and educational survey) शुरू होने जा रहा है. दशहरे का त्योहार खत्म होते ही ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाने का काम शुरू कर देंगे. इस सर्वे को करने की हरी झंडी मिल चुकी है.
यह सर्वे कर्नाटक के कई जिलों में पहले ही शुरू हो चुका था, लेकिन बेंगलुरु में कर्मचारियों की कमी के चलते इसे टाल दिया गया था. अब GBA ने पूरी तैयारी कर ली है और शहर के सभी वार्डों में इसे एक साथ शुरू करने का शेड्यूल बनाया है. इसके लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के कर्मचारियों को लगाया गया है, जिनकी ट्रेनिंग भी शुरू हो चुकी है.
17,000 कर्मचारी, 15 दिन का लक्ष्य
अधिकारियों के मुताबिक, हर वार्ड में 70 से 80 कर्मचारी सर्वे के लिए तैनात किए जाएंगे. पूरे शहर में करीब 17,000 कर्मचारी इस काम में लगेंगे. एक कर्मचारी को 750 घरों का सर्वे करने की ज़िम्मेदारी दी गई है. GBA ने इस बड़े काम को सिर्फ 10 से 15 दिनों के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा है. हालांकि, ज़रूरत पड़ने पर इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है.
GBA के कमिश्नर महेश्वर राव ने साफ़ किया है कि जो भी कर्मचारी बिना किसी जायज़ वजह के ड्यूटी पर नहीं आएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. हां, अगर किसी को स्वास्थ्य से जुड़ी कोई समस्या है, तो उसे ज़रूरी कागज़ात दिखाने पर छूट दी जा सकती है.
क्यों ख़ास है यह सर्वे: यह सर्वे बहुत ज़रूरी माना जा रहा है क्योंकि इससे सरकार को बेंगलुरु में रहने वाले अलग-अलग समुदायों की सामाजिक और शैक्षिक स्थिति का पता चलेगा. हालांकि, अभी भी कुछ चुनौतियां हैं. चुनाव आयोग को भी अपने कामों के लिए कर्मचारियों की ज़रूरत पड़ सकती है, जिससे सर्वे के काम में फिर से कर्मचारियों की कमी का डर बना हुआ है. अब देखना यह है कि क्या यह सर्वे तय समय में पूरा हो पाता है या नहीं.
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