Up kiran,Digital Desk : भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और भारी विवादों के बीच जस्टिस यशवंत वर्मा ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट से इस्तीफा दे दिया। उनके आवास पर जले हुए नोट मिलने की घटना ने पूरे देश को चौंका दिया था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या दागदार दामन के साथ पद छोड़ने वाले जस्टिस वर्मा को सरकारी खजाने से पेंशन और अन्य रिटायरमेंट सुविधाएं मिलती रहेंगी?
कानून की बारीकियां कुछ ऐसी हैं कि इस्तीफा देने के बावजूद जस्टिस वर्मा इन सभी सुविधाओं के हकदार बने रहेंगे। आइए समझते हैं कानूनी स्थिति।
इस्तीफा = रिटायरमेंट: क्या है '1954 का अधिनियम'?
भारतीय न्यायपालिका में न्यायाधीशों की सेवा शर्तें 'हाई कोर्ट जजेस (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954' द्वारा तय होती हैं।
कानूनी प्रावधान: इस कानून के तहत यदि कोई हाई कोर्ट जज अपनी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) की उम्र से पहले इस्तीफा देता है, तो उसे कानूनी रूप से 'रिटायरमेंट' ही माना जाता है।
पेंशन का अधिकार: क्योंकि इस्तीफा रिटायरमेंट की श्रेणी में आता है, इसलिए जज उन सभी पेंशन लाभों, ग्रेच्युटी और भत्तों का हकदार होता है जो एक सामान्य रूप से रिटायर होने वाले जज को मिलते हैं।
कब रोकी जा सकती है पेंशन?
कानून के जानकारों के अनुसार, किसी जज की पेंशन केवल दो स्थितियों में रोकी या छीनी जा सकती है:
महाभियोग (Impeachment): यदि संसद में महाभियोग की प्रक्रिया सफल हो जाती और राष्ट्रपति उन्हें पद से 'हटा' देते, तो उनकी पेंशन रुक सकती थी।
आपराधिक दोषसिद्धि: यदि इस्तीफा देने के बाद भी उन पर आपराधिक मुकदमा चलता है और वे किसी भ्रष्टाचार के मामले में अदालत द्वारा 'दोषी' करार दिए जाते हैं, तो सरकार उनकी पेंशन पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
चूंकि जस्टिस वर्मा ने महाभियोग की संसदीय जांच पूरी होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया है, इसलिए फिलहाल उनकी पेंशन पर कोई आंच नहीं आएगी।
इस्तीफे की टाइमिंग पर सवाल: 10 अप्रैल ही क्यों?
जस्टिस वर्मा को भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपना बचाव करने के लिए 10 अप्रैल से 14 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया था।
रणनीतिक कदम: जिस दिन उन्हें जांच पैनल के सामने अपनी दलीलें शुरू करनी थीं, उसी दिन उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया।
परिणाम: इस्तीफा देते ही उनके खिलाफ चल रही संसदीय जांच (Parliamentary Inquiry) स्वत: समाप्त हो जाएगी, क्योंकि वे अब लोक सेवक (Public Servant) के दायरे से बाहर हो गए हैं।
फ्लैशबैक: क्या था पूरा मामला?
14 मार्च 2025: दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहते हुए जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास के स्टोररूम से भारी मात्रा में नकदी जलने और बरामद होने की खबर आई।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: सुप्रीम कोर्ट ने उनसे न्यायिक कार्य वापस ले लिया और उन्हें उनके मूल हाई कोर्ट (इलाहाबाद) ट्रांसफर कर दिया।
बहिष्कार: इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंचने पर वकीलों ने उनका भारी विरोध किया, जिसके बाद उन्हें वहां भी कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया।
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